इस साल भी नहीं होगा विश्व प्रसिद्ध हरिहरनाथ मेला, लगातार दूसरे साल आयोजन पर लगा ग्रहण

इस साल भी नहीं होगा विश्व प्रसिद्ध हरिहरनाथ मेला, लगातार दूसरे साल आयोजन पर लगा ग्रहण

HAJIPUR/PATNA :  गंगा -गंडक नदी के संगम तट पर हर साल लगने वाले विश्व प्रसिद्ध हरिहरनाथ पशु मेला के आयोजन पर ग्रहण ने रोक लगा दी है। सरकार ने इसके आयोजन पर रोक लगा दी है। यह लगातार दूसरा साल है, जब पशु मेले के आयोजन पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। सरकार की तरफ से मेले के आयोजन पर रोक की वजह कोरोना महामारी को बताया गया है। जिसको लेकर अब स्थानीय व्यापारियों में सरकार के फैसले को लेकर मायूसी जाहिर है। 

बिहार में कोरोना महामारी का प्रभाव कम होने के बाद जहां हर तरह के कार्यक्रमों के आयोजन पर छूट दे दी गई है। पर्व त्योहार का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि इस बार हरिहरनाथ मेले के आयोजन को भी सरकार मंजूरी प्रदान की जाएगी। लेकिन सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है। सरकार के इस फैसले को लेकर व्यापारियों में निराशा के साथ गुस्सा भी नजर आ रहा है। 

पीएम और प्रेसिडेंट करें दखल

विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला से प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के नाम पर विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला पर प्रतिबंध लगाया गया है जो उचित नहीं है. इसको लेकर बिहार सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया गया. लोगों का कहना है कि सीएम नीतीश कुमार जानबूझकर मेले पर बेवजह प्रतिबंध लगाए हुए हैं. ऐसे में देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करें।

प्रतिबंध से आजिविका पर प्रभाव

सोनपुर मेले पर लगे प्रतिबंध का असर यहां के छोटे छोटे कारोबारियों पर पड़ा है, जिनके लिए एक माह तक चलनेवाला यह मेला आमदनी का बड़ा जरिया होता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।  प्रतिबंध के कारण उनके सामने आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि कई छोटे दुकानदार ऐसे थे, जो इसी मेले की एक महीने की कमाई से पूरे साल अपनी आजीविका चलाते थे

विश्व प्रसिद्ध हरिहर नाथ बाबा मेला सोनपुर में गंगा और गंडकी नदी के संगम पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से शुरू होता है और लगभग एक महीने तक चलता है. ये मेला पशु मेले के नाम से भी विख्यात है. जिसमें हाथी, घोड़ा, ऊंट, गाय, भैंस, चिड़िया और बकरी जैसे सभी जानवरों की खरीद बिक्री यहां बड़े पैमाने पर होती थी. लेकिन पिछले एक दो साल से हाथी की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जिससे इस मेले की रौनक काफी कम हो गई है. 


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