फुलवारीशरीफ में डॉली परिक्रमा में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु, 204 साल से चली आ रही है परंपरा

फुलवारीशरीफ में डॉली परिक्रमा में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु, 204 साल से चली आ रही है परंपरा

PATNA : पटना के फुलवारीशरीफ में निकला 204 वां माता की डॉली (खप्पड़ ) पूजा में हजारों भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सबसे आगे-आगे हाथ में जलता हुआ खप्पड़ लेकर दौड़ते मंदिर के पुजारी सह मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जितमोहन पंडित और उनके पीछे पीछे हजारों श्रद्धालुओं की तादाद माता के जयकारे लगाते दौड़ने लगे। आस्था और विश्वास के साथ चली आ रहे वर्षों पुरानी परंपरा में शामिल लोग हाथों में पारंपरिक हथियार, तलवार, भाला त्रिशूल लिए माता के जयकारे लगाते रहे । जय माता दी, जय माता दी जय माँ काली जय माता दी जय माँ काली जय माता दी के गगनभेदी जयकारे से चारों दिशाएं गूंजने लगी। हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब अपने शहर के दो सौ चार साल पुरानी आस्था और परम्परा को आज भी जिस उत्साह से निभा रहे हैं उसका स्वरूप देख लोग आश्चर्यचकित थे। रविवार की संध्या की बेला में फुलवारी शरीफ शहर में आस्था की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही थी। जितनी श्रद्धालुओं की संख्या परिक्रमा में माता की डाली के पीछे पीछे दौड़ लगा रहे थे। उससे अधिक सड़क के दोनों किनारे व छतों पर खड़े होकर श्रद्धालुओं का उत्साह वर्धन करते , जयकारे लगाते और पुष्प वर्षा कर स्वागत कर रहे थे। श्रद्धा भक्ति उत्साह और आस्था का अनूठा और अलौकिक मनमोहक यह दृश्य किसी को भी एक बार रोमांचित करने के लिए काफी था। 

रविवार की सांध्य बेला में सात बजकर तीस मिनट पर माता की डाली खप्पड़ पूजा का मनोहारी और आस्था की अनुठी और विहंगम दृश्य शहर के प्रखंड मुख्यालय के सामने स्थित मां काली मंदिर देवी स्थान (शीतला मंदिर) संगत पर से निकलते हुए जिन लोगों ने देखा वे अपने को धन्य  महसूस करे रहे थे। श्री देवी स्थान शीतला माता मंदिर से शुरू हुई खप्पर परिक्रमा जहां-जहां से गुजरी माहौल भक्तिमय हो उठा। क्या बच्चों क्या जवान औऱ क्या महिलाएं युवतियों बुजुर्गों का सैलाब , सबका उत्साह और भक्ति देखते ही बन रहा था। इस खप्पर पूजा में हजारों की संख्या में महिलाएं व युवतियों को अपने साथ छोटे बच्चों को कंधे पर बिठाए माता की डाली परिक्रमा में देख लोग मंत्रमुग्ध होते रहे। श्रद्धालुओं का सैलाब माता के जयकारे लगाता पारंपरिक हथियार, तलवार, भाला, लाठी आदि लेकर माता काली के मंदिर से निकलकर टमटम पड़ाव, चौराहा गली, सदर बाज़ार, प्रखंड मुख्यालय मोड़ होकर वापस मंदिर पहुंचा। इस बीच पूरा इलाका जय माता दी के जयकारों से गूंजता रहा। लगभग डेढ़ किलोमीटर तक नगर भ्रमण के बाद खप्पर की परिक्रमा मंदिर परिसर में आकर संपन्न हुई। फिर पूजा- अर्चना के बाद प्रसाद वितरण हुआ। 

पूजा को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई थी। वहीं रविवार की शाम मंदिर पहुंचकर स्थानीय सांसद रामकृपाल यादव ने भी पूजा-अर्चना की।  इसके लिए फुलवारी शरीफ  से सटे सभी थानों से जवानों को बुलाया गया था।  परिक्रमा शुरू होने से एक घंटा पहले ही पटना को जाने और आने वाली सभी वाहनों पहले ही रोक दी गई। इस अनोखे अयोजन को देखने के लिए सुबह से ही लोग संगत पर माता के मंदिर में पहुँचने लगे थे। दोपहर बाद हजारों श्रद्धालुओं के सैलाब से शहर पट गया था। सुबह से ही मंदिर में पूजन हवन चल रहा था। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सिटी एसपी पश्चिम राजेश कुमार एडिशनल एसपी मनीष कुमार सिन्हा फुलवारी शरीफ बेउर जानीपुर गर्दनीबाग खगौल रूपसपुर नौबतपुर दानापुर समेत आसपास के कई थानों की पुलिस बड़ी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स  बीएमपी जवान ट्रैफिक पुलिस के जवानों को लगाया गया था। महामारी से लोगों की जान बचाने के लिए 204 साल से निकाली जा रही फुलवारी में माता की डॉली। लोगों का यह मानना है कि कई तरह के महामारी को भगाने के लिए यह पूजा लगभग 200 वर्षों से भी अधिक समय से होता आ रहा है। 

बताते चलें कि ब्रिटिश काल के 1818 में फुलवारी शरीफ में एक भीषण महामारी फैली थी। महामारी की चपेट में आने से असमय कई लोग काल के गाल में समा गए। चारों तरफ  महामारी और अकाल का प्रकोप तेजी से फैलने लगा। बताया जा रहा है कि उस समय शीतला मंदिर के पुजारी झमेली बाबा को मां देवी सपने में आकर उनकी पूजा आराधना की बात कही थी। झमेली बाबा ने उस समय 9 दिनों तक देवी मां की आराधना की और डाली पूजा खप्पड़ निकाला। इस पूजा के आयोजन से फुलवारी शरीफ से महामारी दूर हो गई और यहां खुशहाली छा गई। ऐसी मान्यता है कि तभी से आज तक शीतला मंदिर से प्रत्येक वर्ष सावन महीने में देवी माता की खप्पड़ पूजा निकाली जाती है।

मंदिर के महासचिव देवेंद्र प्रसाद ने बताया कि शीतला माता मंदिर से निकली माता की डाली नगर की एक परिक्रमा करने के बाद वापस मंदिर में स्थापित कर दी जाती है। बताया जाता है कि इस अनोखी पूजा में मंदिर के भगत हाथ में एक खप्पड़ में आग लेकर सबसे आगे दौड़ते हैं। भक्तजन भगत ( पुजारी जी) के पीछे पीछे देवी मां की जयकारा लगाते हुए पूरे नगर की परिक्रमा करते हैं। पूजा को लेकर प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर परिषद की तरफ से नगर के चारों तरफ साफ-सफाई सहित रोशनी की व्यवस्था की गई थी वहीं बिजली विभाग की तरफ से जर्जर तारों को दुरुस्त किया गया था ताकि किसी तरह का कोई अप्रिय घटना नहीं हो सके।

पटना से सुमित की रिपोर्ट

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