औरंगाबाद में बाघ की दस्तक से लोगों में दहशत का माहौल, रेस्क्यू में जुटी वन विभाग की टीम

औरंगाबाद में बाघ की दस्तक से लोगों में दहशत का माहौल, रेस्क्यू में जुटी वन विभाग की टीम

AURANGABAD : जिले के अंबा में बाघ की दस्तक से दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है की बाघ बतरे नदी के सहारे अंबा पहुंचा। इसके बाद गांव-गांव में चहलकदमी कर रहा है। जिसे देखकर इलाके में दहशत कायम है। लोग घरों में कैद हैं। वन विभाग के अधिकारी इलाके में कैम्प कर रहे हैं। बाघ से बचने के लिए स्थानीय लोग रात में पटाखा फोड़ा और मशाल जलाया। ताकि बाघ डर से गांव की तरफ रूख न करे। बाघ सबसे पहले सिमरा जाने वाली बतरे नदी पुल के नीचे दिखा। नेउरा गांव के विवेक पासवान बाघ को देखते ही चीख पड़ा और भागा। बाघ नेउरा, नेउरा बिगहा, लभरी खुर्द और फिर आखिरी बार परसावां गांव के पास दिखा है। परसावां गांव की बेला देवी ने बतायी कि बाघ को टीवी में देखे थे। कभी सामने से नहीं देखी। गांव के बाहर झाड़ी में विशाल बाघ पर नजर पड़ी। मैं डरकर चीखते हुए गांव में भागी। बाघ झाड़ी के तरफ जा रहा था। कई ग्रामीण की नजर बाघ पर पड़ी है। जिसके कारण इलाके में दहशत का माहौल है।

सूचना के बाद महाराजगंज वन प्रमंडल के रेंजर मनोज कुमार सिंह, वन कर्मी रामविलास कुमार, अरविंद कुमार सिन्हा व संतोष कुमार सोनी मौके पर पहुंचे। नदी और खेतों का जायजा लिया। नदी और खेत में जिस रास्ते से होकर बाघ गुजरा। वहां उसके पंजे का निशान मिला है। पंजे के निशान को रेंजर द्वारा जांच के लिए डीएफओ और पटना टीम को भेजा गया। जांच में पाया गया कि ये बाघ से थोड़ा छोटा होने वाला लकड़बघा का पंजे का निशान है, लेकिन ये भी खतरनाक होता है। बाघ की तरह ही शिकार करता है। 

रेंजर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि लकड़बग्घे का पंजे का निशान मिला है। इस पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है। आमलोगों से अपील की गई है कि वे खुद और अपने जानवर को सुरक्षित रखें। रात में घर के बाहर न सोयें और जानवर को भी न रखें। लकड़बग्घे का पकड़ने के लिए रेस्क्यू किया जाएगा। फिलहाल इलाके को चिन्हित किया जा रहा है।

अंबा में जो बाघ आया है। वह झारखंड जंगल का बताया जा रहा है। क्योंकि अंबा-कुटुम्बा के दक्षिण में झाखरंड है। झारखंड में बड़ा जंगली इलाका है। जिसमें बाघ रहते हैं। उसी जंगल से भटककर बाघ औरंगाबाद के अंबा इलाके में पहुंचा। हाल ही में कुछ दिन पहले टंडवा इलाके के काला पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बाघ को देखा गया था। पंजे की निशान भी मिला था, लेकिन फिर अचानक गायब हो गया था। दोबारा बाघ नजर नहीं आया था। 17 नवंबर को काला पहाड़ में बाघ देखा गया था। वन अधिकारी ने बताया कि झारखंड के पलामू टाईगर रिजर्व इलाका एक हजार वर्ग फूट में फैला हुआ है। जहां बाघ रहते हैं। शायद वहीं से भटका है, लेकिन ये बाघ नहीं उससे छोटा लकड़बघा है।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट

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