बाबा साहेब की 128वीं जयंती आज, ऐसे अकेले भारतीय जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्सक के साथ लगी है

बाबा साहेब की 128वीं जयंती आज, ऐसे अकेले भारतीय जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्सक के साथ लगी है

NEWS4NATION DESK : देश के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक बाबा साहेब डॉ। भीमराव अंबेडकर की आज 128वीं जयंती है। 

भारतरत्न डॉ। भीमराव अंबेडकर की जयंती। आज की राजनीति में भीमराव अंबेडकर ही एक मात्र ऐसे नायक हैं, जिन्हें सभी राजनीतिक दलों में उन्हें 'अपना' बनाने की होड़ लगी है। यह बात सही है कि अंबेडकर को दलितों का मसीहा माना जाता है, मगर यह भी उतना ही सही है कि उन्होंने ताउम्र सिर्फ दलितों की ही नहीं, बल्कि समाज के सभी शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों की बात की। उनके विचार ऐसे रहे हैं जिसे न तो दलित राजनीति करने वाली पार्टियां खारिज कर पाई है और न ही सवर्णों की राजनीति करने वाली पार्टियां।

बाबा साहेब का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। वे अपने माता-पिता की 14वीं और अंतिम संतान थे। बाबा साहेब के नाम से मशहूर अंबेडकर अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों जैसे छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया। इस दौरान बाबा साहेब गरीब, दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। 

ये अकेले भारतीय हैं, जिनकी प्रतिमा लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्‍स के साथ लगी है। साल 1948 में डॉ। अंबेडकर मधुमेह से पीड़ित हो गए। छह दिसंबर, 1956 को इनका निधन हो गया। डॉ। अंबेडकर को देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। इनके निधन के 34 साल बाद वर्ष 1990 में जनता दल की वी।पी। सिंह सरकार ने इन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया था। 

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