शर्मनाक! लॉकडाउन में ट्रेनी DSP की गुंडागर्दी, पिता पुत्र को बेरहमी से पीटा,तस्वीरें झूठ नहीं बोलती...

शर्मनाक! लॉकडाउन में ट्रेनी DSP की गुंडागर्दी, पिता पुत्र को बेरहमी से पीटा,तस्वीरें झूठ नहीं बोलती...

PATNA: लॉकडाउन के दौरान पटना पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। कुछ ऐसे पुलिसवाले भी हैं जिनकी हरकत से पूरे डिपार्मेंट की नाक कटती है। लॉकडाउन में पटना पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आया है। पटना पुलिस के एक ट्रेनी DSP की गुंडई की चर्चा पालीगंज के इलाकों में सुर्खियां बटोर रही हैं। मामला पटना जिले के पालीगंज का है।

पालीगंज के प्रशिक्षु डीएसपी राजीव कुमार सिंह और उनकी टीम पर आरोप है कि इनलोगों ने बाप बेटे की बड़ी बेरहमी से पिटाई कर दी और घसीटते हुए थाने ले गई और घण्टो हाजत मे बंद कर दिया। पुलिस ने हाजत में ही दोनों को बड़ी बेरहमी से पिटाई की। जिसके बाद ऐसा पुलिसिया रॉब दिखाया कि उसे देखकर लोग हतप्रभ और दंग रह गए। बताया जाता है कि जख्मी युवक पालीगंज बाबा बोरिंग रोड मोहल्ले निवासी भूषण वर्मा और उनके पुत्र विकास कुमार, जो कि यूपीएससी की तैयारी के लिए 23 मई को संपूर्ण क्रांति ट्रेन से दिल्ली जाने वाले थे। जिसके लिए कुछ जरूरी समान की खारीदारी के लिए सुबह एक दुकान पर सड़क किनारे बाइक लगाकर समान की खरीददारी कर रहे थे। इस दौरान एक तेज गति से जा रही स्कॉर्पियो ने बाइक को टक्कर मार दिया। 

बाइक में धक्का लगने के बाद स्कॉर्पियो को रुकवाकर पिता पुत्र उससे पूछताछ कर ही रहे थे कि पालीगंज थाने मे कुछ ही दिन पूर्व आए एक प्रशिक्षु डीएसपी राजीव कुमार सिंह और एसआई प्रदीप कुमार ने दलबल के साथ पहुंचकर युवक विकास कुमार और उसके पिता भूषण वर्मा को पकड़ कर गाली गलौज करने लगे। जिसका विरोध पिता पुत्र ने किया जिसपर भड़कते हुए प्रशिक्षु डीएसपी ने युवक और उसके पिता की सरेआम बीच सड़क पर पिटाई करने लगे। इसके बाद दोनों को थाने मे लेकर चले गए। हालांकि बाद में इन दोनों को छोड़ दिया गया। पिटाई के कारण विकास दिल्ली नही जा सका। जिसके बाद पीड़ित भूषण वर्मा ने इस घटना के विरोध में पालीगंज डीएसपी, एसएसपी, मुख्यमंत्री समेत तमाम संबंधित पदाधिकारियों के पास लिखित आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। इधर, पालीगंज डीएसपी तनवीर अहमद ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है जांच के बाद करवाई की जाएगी।

थाने में आरोपियों की पिटाई करना गैरकानूनी

जानकारों का कहना है कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। थाने में आरोपियों की पिटाई करना गैरकानूनी है। इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई गैरसंवैधानिक है। ऐसे पुलिस पदाधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पटना ग्रामीण से सुमित की रिपोर्ट


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