बिहार में गैर पंजीकृत मठ-मंदिरों का तीन महीने में कराना होगा रजिस्ट्रेशन, कानून मंत्री ने दिया निर्देश, जानें कितनी है संख्या

बिहार में गैर पंजीकृत मठ-मंदिरों का तीन महीने में कराना होगा रजिस्ट्रेशन, कानून मंत्री ने दिया निर्देश, जानें कितनी है संख्या

पटना. बिहार में मठ-मंदिरों को लेकर सभी जिले के अधिकारियों को अहम निर्देश दिया गया है। यह निर्देश बिहार के कानून मंत्री डॉ. शमीम अहमद ने दिया है। इसके तहत प्रदेश में तीन महीने के अंदर गैर पंजीकृत मंदिरों, मठो और न्यास (ट्रस्ट) का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बीएसबीआरटी के मुताबिक बिहार में करीब 4,000 गैर पंजीकृत मंदिरों, मठो और न्यास (ट्रस्ट) है।

इसको लेकर कानून मंत्री शमीम अहम ने कहा है कि राज्य में कई मंदिरों के पुजारियों और मठों के महंतों ने जमीन ट्रांसफर कर दी है या फिर बेच दी है। इस मामले में बड़े पैमाने पर इसमें अनियमितताएं सामने आई हैं। कानून मंत्री शमीम अहमद ने कहा कि अगर गैर पंजीकृत मंदिर, मठ और ट्रस्ट तय समय में पंजीकरण नहीं कराते हैं तो राज्य सरकार सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना होगा।

मंत्री शमीम अहमद ने कहा कि बिहार हिंदू धार्मिक ट्रस्ट कानून, 1950 के मुताबिक बिहार के सभी सार्वजनिक मंदिरों, मठों, ट्रस्ट और धर्मशालाओं को बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड (बीएसबीआरटी) में रजिस्टर्ड होना चाहिए। गैर कानूनी दावों से मंदिरों की जमीन समेत संपत्तियों की हिफाजत के लिए उनका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। प्रदेश के सभी जिलों में मिलाकर करीब 4,000 गैर पंजीकृत सार्वजनिक मंदिर, मठ और ट्रस्ट हैं। उन्हें तीन महीने के भीतर बीएसबीआरटी के साथ अपना पंजीकरण कराना होगा।

बिहार में मठ-मंदिर

बीएसबीआरटी के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में पंजीकृत मंदिरों की कुल संख्या करीब 3002 है और उनके पास 18,500 एकड़ से ज्यादा जमीन है। बीएसबीआरटी द्वारा 35 जिलों से संकलित आंकड़ों के मुताबिक बिहार में लगभग 4,055 गैर पंजीकृत मंदिर और मठ हैं और वे कुल 4,400 एकड़ से ज्यादा जमीन के मालिक हैं। गैर पंजीकृत मंदिरों, मठों की संख्या सबसे अधिक मुजफ्फरपुर में 433 हैं। इसके अलावा समस्तीपुर में 272, दरभंगा में 259, पूर्वी चंपारण में 226, भागलपुर में 210, वैशाली में 209, सीतामढ़ी में 203, रोहतास में 210, भोजपुर में 197, बेगूसराय में 170, नालंदा में 159 और सारण में 154 हैं।

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