यूपी का चुनावी समर : स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोंकना शेष, संक्रांति पर मचाएंगे भूचाल

यूपी का चुनावी समर : स्वामी प्रसाद मौर्य का भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोंकना शेष, संक्रांति पर मचाएंगे भूचाल

दिल्ली. यूपी के चुनावी युद्ध में फ़िलहाल राजनीतिक दल एक दूसरे के घरों में सेंध लगाने में लगे हैं. खासकर भाजपा छोड़ने वाले योगी सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य इस समय राज्य की राजनीति में चर्चा के केंद्र बन चुके हैं. अब मौर्य ने कहा हैकि वे 14 जनवरी को भाजपा को और बड़ा झटका देंगे. हालाँकि इस बीच यह भी खबर है कि अभी वे समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं.  वे किस पार्टी में शामिल होंगे इसका जवाब देते हुए स्वामी ने कहा कि सस्पेंस बना रहना चाहिए.  स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि 14 जनवरी को वह अंतिम धमाका करेंगे. यह भाजपा सरकार के ताबूत में आखिरी कील जैसा होगा.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते हुए भाजपा को अलविदा कह दिया था. उनके साथ पार्टी के चार अन्य विधायकों ने भी भाजपा को टाटा कह दिया. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि हम कहां जा रहे हैं इस पर सस्पेंस बना रहना चाहिए. 14 जनवरी को वह घड़ी आयेगी जब अंतिम धमाका होगा. जो भी निर्णय होगा वो भाजपा सरकार के ताबूत में आखिरी कील होगा.इससे पूर्व अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ तस्वीर साझा  की थी. इस मामले में मौर्य ने कहा कि अगर किसी ने मेरा ट्वीट कर धन्यवाद किया है तो मैं धन्यवाद करता हूं. लेकिन मुझे कहां जाना है यह निर्णय मैं कार्यकर्ताओं से मिलकर लूंगा. अंतिम निर्णय कल शाम तक आ जायेगा, जिसको मैं 14 जनवरी को सुना दूंगा.

भाजपा छोड़ने के सवाल पर कहा कि  राजनीति में कोई घरेलू विवाद नहीं होता और ना ही गुस्सा 1 दिन में आता है. आरोप लगाया कि 5 सालों में जो जनविरोधी नीतियां रही हैं उसका प्रतिकार में कैबिनेट में भी करता रहा, साथ ही साथ हम उचित प्लेटफार्म पर भी अपनी बात को रखते रहे. लगातार 5 साल तक इन लोगों ने जन विरोधी नीतियों के प्रति कार्य के लिए कोई उपाय नहीं किया. 5 साल बाद इस्तीफा देने के सवाल पर मौर्य ने कहा कि आज जब उचित अवसर आया, जनादेश पाने की बारी आयी तो मैंने फैसला लिया कि अब  भाजपा सरकार को सबक सिखाने का समय आ गया है.

उधर भाजपा सूत्रों के अनुसार  पार्टी को स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने की भनक पहले से थी इसलिए उनके इस्तीफे के बाद भी कोई संपर्क नहीं साधा गया है. हालांकि पूर्व में  कहा जा रहा था कि उनको मनाने की कोशिशें जारी हैं.

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