नीतीश के मास्टर स्ट्रोक से तिलमिलाहट में हैं कुशवाहा, महागठबंधन में लगातार छोटे होते कद से परेशानी

नीतीश के मास्टर स्ट्रोक से तिलमिलाहट में हैं कुशवाहा, महागठबंधन में लगातार छोटे होते कद से परेशानी

PATNA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बीच सियासी तकरार नया नहीं है। कुशवाहा जब जेडीयू में हुआ करते थे तब भी वह मुखर होकर नीतीश की आलोचना करते थे। नीतीश कुमार जब दोबारा एनडीए में शामिल हुए तब भी पहले से एनडीए में मौजूद कुशवाहा ने उन पर तंज कसना जारी रखा। आखिरकार उपेंद्र कुशवाहा ने जब एनडीए छोड़ने का ऐलान किया तब भी यह माना गया कि कुशवाहा यह फैसला कतई नहीं लेते अगर नीतीश एनडीए से दूर रहते। 

कभी नीतीश कुमार के साथ-साथ राजनीति करने वाले उपेंद्र कुशवाहा नीतीश के सियासी अंदाज़ को भली-भांति जानते हैं। यही वजह है कि जब रालोसपा के विधायकों ने नीतीश कुमार से औपचारिक मुलाकात की थी तभी कुशवाहा ने किया आरोप लगा दिया था कि नीतीश कुमार उनकी पार्टी तोड़ना चाहते हैं। उपेंद्र कुशवाहा की आशंका तब सही साबित हुई जब उनके विधायकों ने पार्टी से दूरी बना ली।

अब एक बार फिर से नीतीश कुमार ने अपने मास्टर स्ट्रोक से कुशवाहा को बड़ा झटका दिया है। शहीद जगदेव प्रसाद की मूर्ति अनावरण के कार्यक्रम में उनके बेटे नागमणि को न्योता देना और फिर नागमणि की तरफ से नीतीश कुमार की तारीफ में कसीदे पढ़ा जाना नीतीश कुमार का नया मास्टर स्ट्रोक है। उपेंद्र कुशवाहा भली-भांति जानते हैं कि नीतीश का या मास्टर स्ट्रोक उनकी पार्टी में टूट करा सकता है। लिहाजा आनन-फानन में उन्होंने नागमणि को कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला भी कर लिया। नागमणि भले ही कुशवाहा को छोड़कर नीतीश के साथ हो लें लेकिन इस मास्टर स्ट्रोक से नीतीश कुमार ने रालोसपा को जो बड़ा झटका दिया है वह महागठबंधन में कुशवाहा का कद छोटा कर गया। पहले से ही महागठबंधन में सीट हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं कुशवाहा का कद नागमणि के जाने से छोटा होना तय है। क्योंकि सियासी जानकार मानते हैं कि कुशवाहा ने अपने समाज से आने वाले नेताओं को पिछले दिनों रालोसपा के साथ इसीलिए जोड़ा था ताकि वह यह दावा कर सकें कि बिहार के अंदर कुशवाहा समाज और उसके नेता पूरी तरह रालोसपा के साथ हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार के इस मास्टर स्ट्रोक से कुशवाहा कैसे उबर पाते हैं।

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