उत्तराखंड के लिए 1141 सौ करोड़ का आपदा राहत का ऐलान , पहली किस्त की गई जारी, राज्यसभा में गृह मंत्री ने दी जानकारी

 उत्तराखंड के लिए 1141 सौ करोड़ का आपदा राहत का ऐलान , पहली किस्त की गई जारी, राज्यसभा में गृह मंत्री ने दी जानकारी

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चमौली घटना की जानकारी देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि ऋषि गंगा में हिमस्खलन के कारण आई बाढ़ से यहां बन रहे 13.2 मेगावाट की छोटी जल विद्यूत योजना पूरी तरह से बह गई। उन्होंने बताया कि निचले क्षेत्र के तपोवन के पास धौलीगंगा में एनटीपीसी के निर्माणाधीन 520 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना को भी नुकसान पहुंचा है। गुलाम नबी आजाद सहित चार राज्यसभा सांसदों के कार्यकाल समाप्ती के मौके पर सभी सांसदों के संबोधन के कारण लगभग दो घंटे के विलंब से सदन में इस जल प्रलय को लेकर गृहमंत्री ने बताया कि अब निचले क्षेत्र में अब कोई खतरा नहीं है और जलस्तर में भी कमी आई है।

1141 करोड़ के राहत  पैकेज का ऐलान

अमित शाह ने बताया कि सात फरवरी को ही नेशनल क्राइसिस की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें आपदा राहत के लिए सभी विभागो को समन्वय स्थापित कर काम करने के लिए कहा गया है। वित्त वर्ष 20-21 के आपदा जोखिम प्रबंधन कोष से 1141 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं, जिसकी पहली किस्त के रूप में 468 करोड़ की राशि जारी कर दी गई है

गृह मंत्री ने सदन को बताया कि हम हर स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को हुए घटना को लेकर उन्होंने बताया कि समुद्र तल से 5600 मीटर ऊपर हिमस्खलन हुआ, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि बीते सोमवार शाम तक 20 लोगों के शव निकाले जा चुके थे। वहीं 197 लापता हैं, जिनमें एनटीपीसी के 139, 12 ग्रामीण और ऋषि गंगा के 46 लोग शामिल हैं। गृह मंत्री ने कहा कि एनटीपीसी के 12 लोग और ऋषि गंगा के 15 लोगों को बचाने में कामयाबी मिली है। 

उन्होंने बताया कि एनटीपीसी के दूसरे टनल में 20-25 लोग फंसे हुए हैं, इस टनल में फंसे हुए लोगों को निकालने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। साथ ही लापता लोगों की तलाश की जा रही है। अमित शाह ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी मारे गए लोगों को चार लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया गया है।  उन्होंने बताया कि पुल टूटने के कारण 13 गांवों से संपर्क टूट गया है। फिलहाल वहां जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। केंद्र 24 घंटे पर निगरानी रख रही है और राज्य के हर प्रकार की सहायता दी जा रही है। आईटीबीपी ने वहां कैंप संभाल रही है। एनडीआरएफ की पांच टीमें और आर्मी की 8 टीमें वहां काम कर रही हैं। वहीं नेवी और एयरफोर्स की भी सहायता ली जा रही है।




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