देश मे वेंटिलेटर सिर्फ 30 हजार, कोरोना संकट को देखकर परेशान है सरकार

देश मे वेंटिलेटर सिर्फ 30 हजार, कोरोना संकट को देखकर परेशान है सरकार

News4nation desk : कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के रफ्तार पर रोक लगाना निहायत जरूरी है। हालांकि बताया जा रहा है कि जनता कर्फ्यू से हम कोरोना संक्रमण के रफ्तार को 50 प्रतिशत तक रोक देंगे। 

लेकिन बड़ा सवाल है की एक अरब से 30 करोड़ आबादी वाले देश में अगर कोरोना ने रफ्तार पकड़ लिया तो क्या हमारे पास मेडिकल इक्विपमेंट्स उपलब्ध है। ताकि हम पीड़ित लोगों का इलाज कर सकें। जी हां कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान जो सबसे अहम मेडिकल इक्विपमेंट्स है वह वेंटिलेटर है। बता दें कि पूरे देश में वेंटिलेटर की संख्या सिर्फ 30 हजार है।

सरकार ने कम्पनियों से पूछा प्रतिदिन किटने वेंटिलेटर बना सकते हो

1 अरब 37 करोड़ आबादी वाले देश मे सिर्फ 30 हजार वेंटिलेटर ही उपलब्ध है। वाकई सरकार के लिए यह चिंता का विषय है। 

गौरतलब है की तीस हजार वेंटीलेटर जो फिलहाल देश में उपलब्ध बताया जा रहा है उसमें से 80% वेंटिलेटर आईसीयू निजी अस्पतालों में हैं। अब सवाल उठता है कि कोरोना जिस रफ्तार से संक्रमण फैलाता है अगर वह हो गया तो फिर क्या होगा? 

केंद्र के स्वास्थ्य महानिदेशक ने वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की थी। कंपनियों ने स्पष्ट कहा है कि देश में फिलहाल वेंटिलेटर का स्टॉक उतना नहीं है ।सरकार ने कंपनियों से अभी पूछा है कि प्रतिदिन कितने वेंटीलेटर्स का प्रोडक्शन किया जा सकता है। 

बताया जा रहा है कि इस संबंध में  कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं ।क्योंकि वेंटीलेटर्स बनाने के लिए कुछ पार्ट्स चीन से आयात किया जाता है। लेकिन चीन से सप्लाई पूरी तरह रुकी हुई है।  ऐसी स्थिति में वेंटिलेटर उसके प्रोडक्शन में समस्या आ रही है ।केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को आदेश दिया गया है कि आप ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था करके रखें। चिकित्सकों का कहना है कि 

कोरोना से संक्रमित 80 फ़ीसदी मरीज होम क्वॉरेंटाइन में रखने से ठीक हो जाते हैं ।वहीं 5 फ़ीसदी मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।

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