साथी हाथ बढ़ाना...की तर्ज पर साथ आए ग्रामीण, श्रमदान और चंदा कर बनाया चचरी पुल, सांसदो और विधायकों को चुनाव में देंगे जवाब

साथी हाथ बढ़ाना...की तर्ज पर साथ आए ग्रामीण, श्रमदान और चंदा कर बनाया चचरी पुल, सांसदो और विधायकों को चुनाव में देंगे जवाब

KISHANGANJ: बिहार राज्य में अगर पिछड़े जिले की बात आती है तो उसमें सबसे पहला किशनगंज का नाम आता है। आखिर क्यों इतना पिछड़ा है किशनगंज? क्या इसमें उन भोले भाले जनता का दोष है, जो वोट देकर अपने रहनुमाई करने वाले नेता को चुनते हैं? या फिर यहां की यहां के विधायक या सांसद, जो विधानसभा और सांसद में क्षेत्र और जनता की समस्याओं का सही तरीके से रहनुमाई नही कर पाते हैं?

किशनगंज जिले के सांसद हो या विधायक, वह खुद बराबर सरकारी सेवाओं का लाभ लेते हैं, लेकिन जनता को सरकारी सेवा का लाभ नहीं दिला पाते हैं। मामला जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र के हवाकॉल पंचायत का है। जहां वार्ड नंबर 3 में रतवा नदी में पुल के अभाव के कारण लोगों का आवागमन बाधित रहता है। जब पानी रहता है तो लोग जान हथेली पर रखखर नाव से नदी पार कर किसी तरह रोजमर्रा के काम करते हैं। अब पानी कम हो गया है नाव तो चल नहीं सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि अब लोग आवाजाही करे तो करे कैसे? यहां जरूरत थी किसी स्थानीय नेता विधायक, सांसद या जिला प्रशासन को कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की, ताकि लोग किसी तरह आवाजाही कर सके लेकिन न जिला प्रशासन और न ही विधायक या सांसद ने इस गांव के लोगों के समस्याओं का सूद लिया। 

मगर कहते हैं न हिम्मत-ए-मर्दा, तो मदद-ए-खुदा। अंत में गांव के लोगो ने बांस के सहारे और श्रमदान कर चचरी पुल बना लिया ताकि लोग आवाजाही कर सके। इसमें दिलचस्प बात यह है कि यह चचरी पुल लोगों ने अपने ही गांव मे चंदा करके बनाया है। इसमें जिला प्रशासन, स्थानिय विधायक या सांसद का कोई सहयोग नही मिला और गांव के गरीब लोगों चंदा करके जो यह चचरी पुल का निर्माण किए है। यह यहां के स्थानीय विधायक और सांसद के मुंह पर कड़ा तमाचा है, जो सिर्फ विकास वोट के लिए जनता के सामने खोकले दावें करते है। जरूरत है सरकार को इस क्षेत्रों में विशेष तौर पर काम करने की ताकि ऐसे पिछड़े इलाकों का विकास हो सके।

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