विष्षुपद मंदिर विवाद पर हाईकोर्ट ने की सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी - 'हर कार्य के लिए कोर्ट के आदेश की क्यों जरूरत है'

विष्षुपद मंदिर विवाद पर हाईकोर्ट ने की सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी -  'हर कार्य के लिए कोर्ट के आदेश की क्यों जरूरत है'

पटना। विष्णुपद मंंदिर के अधिकार को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हर कार्य के लिए कोर्ट के आदेश की आवश्यकता क्यो पड़ती है। कोर्ट ने यह सुनवाई गया के व्यवहार न्यायालय के उस फैसले को लेकर दी है, जिसमें मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी धार्मिक न्यास बोर्ड को देने का आदेश दिया था। कोर्ट के इस फैसले के लेकर पंडा समाज में हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। 

बुधवार को मामले में हुई सुनवाई समाज की तरफ से यह बताया गया कि बोर्ड के अध्यक्ष आचार्य कुणाल किशोर के पद से हटने के बाद अभी तक नए बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। ऐसे में धार्मिक न्यास बोर्ड को मंदिर की जिम्मेदारी देना सही नहीं है। मामले में सुनवाइ करते हुए चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा है कि अब तक नए बोर्ड का गठन क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा हर मामले में हाईकोर्ट के दखल की आवश्यकता क्यो पड़ती है। 

पंडाओं को भी पड़ी फटकार, पूछा आपका अधिकार कैसे

हाईकोर्ट ने मंदिर की बदहाली पर दायर पीआईएल को सुनते हुए गयावाल पंडा समुदाय के दावों पर नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस. कुमार की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गौरव सिंह की याचिका को सुना। साथ ही सख्त लहजे में यह सवाल उठाया कि लाखों तीर्थयात्री व सैलानियों को आकर्षित करने वाला विष्णुपद मंदर कैसे किसी वर्ग विशेष (गयावाल पंडा समुदाय) के आधिपत्य व कब्जे में रह सकता है? कोर्ट ने कहा कि मंदिर व उसकी संपत्ति पर दावा करने वाले गयावाल पंडा समाज ध्यान रखें कि उनकी हैसियत जनता की इच्छा से बढ़कर नहीं है। कोर्ट ने गया की निचली अदालत को निर्देश दिया कि मंदिर व उसकी संपत्ति सार्वजनिक है या नहीं, इस मामले पर सुनवाई में तेजी लाए। वहां इस मसले पर सुनवाई चल रही है। 

तेज हुई लड़ाई 

मामले में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट को बताया कि गया के विख्यात विष्णुपद मंदिर की बदहाली के लिए वहां के गयावाल पंडे और उनकी लालची करतूत जिम्मेदार है। वहीं याचिकाकर्ता की तरफ दलील दी गई न्यास बोर्ड और सरकार के कई प्रयास के बावजूद विष्णुपद क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है। यह क्षेत्र केवल वहां के पंडों के वर्चस्व की लड़ाई में बदहाल होता जा रहा है। 

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