BJP-JDU में जंगः बीजेपी ने सहयोगी दल को दिखाया आइना-अपना कद नाप लें...दूसरे के कंधे पर बैठ 'उंचा' दिखाने की कोशिश न करें, जेडीयू ने भी दिया जवाब...

BJP-JDU में जंगः बीजेपी ने सहयोगी दल को दिखाया आइना-अपना कद नाप लें...दूसरे के कंधे पर बैठ 'उंचा' दिखाने की कोशिश न करें, जेडीयू ने भी दिया जवाब...

PATNA: साहित्यकार दया प्रकाश सिन्हा ने सम्राट अशोक को औरंगजेब से तुलना कर दी। इसके बाद बिहार की सत्ताधारी दो दलों के बीच अंदर की लड़ाई बाहर आ गई है। शुरूआत जेडीयू की तरफ से की गई। जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा ने इस मसले पर सीधे बीजेपी व केंद्र सरकार को घेर लिया। इसके बाद तो बीजेपी भी खुलकर मैदान में आ गई। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बिना नाम लिये जेडीयू नेतृत्व पर बड़ा हमला बोला। इसके बाद जेडीयू के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने बिहार बीजेपी अध्यक्ष के खिलाफ आग उगलना शुरू कर दिया। अपने अध्यक्ष पर हो रहे पॉलिटिकल हमले पर भला दल के नेता चुप कैसे रह सकते थे। लिहाजा संजय जायसवाल की तरफ से मंत्री से लेकर प्रवक्ता तक मैदान में उतर गये हैं और जेडीयू नेतृत्व को आइना दिखा दिया है। बीजेपी नेताओं द्वारा जेडीयू नेतृत्व को आईना दिखाने के बाद तिलमिलाये जेडीयू प्रवक्ताओं का हमला जारी है।

जेडीयू दल नहीं गिरोह- बीजेपी

बीजेपी की तरफ से आज प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने जेडीयू नेतृत्व को आईना दिखा दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों के कंधे पर बैठकर राजनीति में खुद को ऊँचा देखने वाले अपना कद नाप लें, अपने गिरेबान में झाँकें। क्षेत्रीय दलों और निजी पॉकेट की दुकानों के तथाकथित राष्ट्रीय नेताओं ने राजनीति को वैचारिक आडंबर की आड़ में मसखरेबाज़ी,अय्याशी,धन उगाही और गिरोह संस्कृति का माध्यम बना दिया है


सम्राट चौधरी ने भी दिया करारा जवाब

मंत्री सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिये जेडीयू नेतृत्व पर हमला बोला और कहा कि कुछ लोग विवादास्पद लेख पर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। वैसे लोग ज्ञानी नहीं बल्कि अभिमानी हैं। सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिये जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा पर तंज कसा। कहा कि कुछ राजनीतिक दल के लोग विवादास्पद लेख पर राजनीति चमकाने का काम करने लगे हैं। लेकिन बीजेपी अध्यक्ष के निर्णय से पूरे मामले का पटाक्षेप हो गया। जो ज्ञानी होता है उसे समझाया जा सकता है ,जो अज्ञानी होता है उसे भी समझाया जा सकता है, लेकिन जो अभिमानी होता है उसे कोई नहीं समझा सकता उसे वक्त ही समझाता है.

जेडीयू बोली- खुद को राष्ट्रीय नेता मानने लगे हैं संजय जायसवाल

जेडीयू नेतृत्व को आईना दिखाये जाने पर जेडीयू नेता भला कहां चुप रहने वाले। पार्टी प्रवक्ता निखिल मंडल ने बिना नाम लिये अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल पर अटैक किया। कहा कि कोई नेता जब क्षेत्रीय दल को छोड़ राष्ट्रीय दल में चला जाता है तो वो खुद को भी राष्ट्रीय नेता मानने लगता है। जबकि नेता दल के आकार से नही बल्कि व्यक्तित्व से बनता है। कर्म अच्छे होंगे तो लोग आपको महत्व देंगे वरना जनता मालिक है और ये मालिक धूल चटाने में भी वक्त नही लगाती। 

जेडीयू के निशाने पर संजय जायसवाल

अभिषेक झा ने बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए एक के बाद एक दो ट्वीट किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल जी, आप आत्मचिंतन कीजिए और अपने गिरेबान में झांक कर देखिए कि बीते 1 वर्ष में आपने एनडीए गठबंधन के खिलाफ कितने बयान दिए हैं?' यदि स्मरण ना हो तो सभी बयानों का संकलन करके आपको भेजा जा सकता है.' आगे अभिषेक झा ने ट्वीट कर कहा, 'शराबबंदी सरकार की नीति रही है लेकिन जहरीली शराब पीने से आपके लोकसभा क्षेत्र में जब कुछ लोगों की मृत्यु हुई थी, आप संवेदना व्यक्त करने और सांत्वना स्वरूप पैसे बांटने गए थे। एनडीए सरकार की नीति के हिसाब से आपका यह आचरण सही था या गलत?' 

ललन सिंह ने साधा था निशाना

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा ने सम्राट अशोक को औरंगजेब से तुलना करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. जेडीयू नेतृतृव ने नाटककार दया प्रकाश सिन्हा पर कार्रवाई करने एवं पद्मश्री वापस लेने की मांग की थी. इसके बाद बीजेपी ने जेडीयू नेताओं पर करारा प्रहार किया है. बीजेपी की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने मोर्चा संभाला और बिना नाम लिये ललन सिंह एवं उपेन्द्र कुशवाहा की जमकर खरी-खोटी सुनाई.

संजय जायसवाल ने साधा निशाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा था कि  कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए नकारात्मक प्रचार भी मेवा देने वाला पेड़ है. पर मुझे आश्चर्य तब होता है जब कुछ समझदार राजनैतिक कार्यकर्ता भी इनके जाल में फंस कर अपना प्रचार में लग जाते हैं. वह यह भी नहीं सोचते कि इससे समाज को कितना नुकसान हो रहा है अगर इन्हें भरपेट मेवा न दिया जाए तो इन्हें उस पेड़ की जड़ में मट्ठा डालने से भी परहेज नहीं होता. यही वजह है कि बुद्धिजीवियों द्वारा इन्हें ‘राजनीतिक भस्मासुर’ की संज्ञा दी जाती है. बिहार में भी एनडीए सरकार की मजबूती और अनुशासन के कारण कुछ ‘ख़ास नेताओं’ को मनमुताबिक मेवा नहीं मिल रहा है. यही वजह है कि यह लोग किसी न किसी मुद्दे पर लगभग रोजाना ही अलग-अलग विषयों पर एनडीए को बदनाम करने के अपने एकसूत्री एजेंडे पर कार्यरत रहते हैं.

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