बिहार में छात्रों पर पुलिस की लाठी बरसे या किसानों पर, CM नीतीश को क्या फर्क पड़ता है...पब्लिक तो वोट देने के बाद पिटाने के लिए ही होती है

बिहार में छात्रों पर पुलिस की लाठी बरसे या किसानों पर, CM नीतीश को क्या फर्क पड़ता है...पब्लिक तो वोट देने के बाद पिटाने के लिए ही होती है

PATNA : अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब BSSC द्वारा आयोजित सचिवालय सहायक की परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर राजधानी पटना की सड़कों पर प्रदर्शन करने उतरे हजारों छात्रों पर पटना पुलिस ने बर्बर तरीके से लाठी बरसाई थी। जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस बारे में पूछा गया तो साफ कहा था कि उन्हें इस कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह इसके बारे में पता करवाते हैं कि क्या मामला है। इसके बाद मामला शांत हो गया। आज इस घटना का जिक्र फिर से इसलिए किया गया क्योंकि एक बार फिर से पुलिस ने वैसी ही घटना दोहराई है। अंतर इतना है कि इस बार मामला पटना का नहीं बक्सर जिले से जुड़ा है। जहां बीती रात पुलिस ने निर्दोष किसानों के घर में घुसकर उन पर लाठियां बरसाई है। जिसके बाद अब बक्सर में किसान और पुलिस आमने सामने आ गए हैं और हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

यहां भी सीएम को कोई जानकारी नहीं

मुख्यमंत्री इन दिनों बिहार के विभिन्न जिलों में जाकर समाधान यात्रा निकाल रहे हैं। आज सुबह उनकी यह यात्रा मधुबनी है। लेकिन, बक्सर में किसानों पर हुए पुलिसिया बर्बरता को लेकर नीतीश जी इस बार भी अंजान ही होंगे। 

राजद के लोग भी चुप

केंद्र के किसान कानून को लेकर जब किसान दिल्ली में जुटे,तो बिहार में राजद कई बार केंद्र सरकार पर हमलावर रही। किसानों पर हो रही कार्रवाई को लेकर लगातार अपना विरोध जताते रहे। वहीं आज 85 दिन से भी ज्यादा समय से किसान अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं तो सत्ता में आते ही राजद ने पुलिसिया कार्रवाई पर चुप्पी साध ली है।

जिला प्रशासन की काबू से बाहर हुआ मामला

बक्सर में पिछले 85 दिनों से किसान भूअधिग्रहण में उचित मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। स्थानीय प्रशासन के साथ कंपनी के अधिकारियों के साथ तमाम बातचीत असफल हो गई है।  वहीं इस मामले को लेकर किसानों ने राज्य सरकार और पीएमओ से दखल देने की मांग भी की है, लेकिन इस मामले में दोनों जगह से कोई कार्रवाई नहीं की गई। राज्य सरकार के किसी मंत्री ने अब तक किसानों की समस्या को दूर करने की कोशिश नहीं की, लेकिन बार बार पुलिस किसानों को जबरन आंदोलन खत्म करने की कोशिश में जुटी है।


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