NDA में सहनी और मांझी की एंट्री से चिराग के मिशन पर क्या पड़ेगा असर, जानिए क्या है राजनीतिक समीकरण..

NDA  में सहनी और मांझी की एंट्री से चिराग के मिशन पर क्या पड़ेगा असर, जानिए क्या है राजनीतिक समीकरण..

DESK: बिहार विधानसभा चुनाव के  मतदान करने की  तारीख नजदीक आने के साथ ही सूबे में दल-बदल और गठजोड़ के लिए सियासी दलों के बीच गतिविधियां जोर पकड़ने लगी है. इसी कड़ी में बिहार में मौजूद दो बड़े सियासी गठबंधन एनडीए और महागठबंधन में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गयी है. अब तक महागठबंधन का हिस्सा रहे विकासशील इंसान पार्टी  के प्रमुख मुकेश सहनी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के मुखिया जीतनराम मांझी ने अपना इरादा बदल लिया है और दोनों दल एनडीए का हिस्सा बन गये है.

वहीं, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार में एनडीए से अलग होकर चुनावी रण में जाने के लोजपा प्रमुख चिराग पासवान के फैसले के बाद भाजपा और जदयू को नये सिरे से रणनीति बनाने को लेकर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया. हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोजपा के इस फैसले के बाद जीतनराम मांझी की पार्टी हम और मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को एनडीए के मंच से चुनावी रण में जाने का बेहतर मौका मिल गया. इसके पीछे अतिपिछड़ा और दलित वोट बैंक के महत्व को एक बड़ा कारण बताया जा रहा है.

इसके साथ ही सियासी गलियारों में इस बात की  चर्चा काफी  जोरों पर है कि महागठबंधन को कमजोर करने के लिए जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी ने एनडीए में शामिल होने का मन पहले ही बना लिया था. बताया जाता है कि महागठबंधन का नेतृत्व कर रही राजद ने इस दोनों दलों के मुखिया को उनके मन मुताबिक सीटें नहीं देने का इशारा कर दिया था. जिसको लेकर मुकेश सहनी और जीतनराम मांझी नाराज चल रहे थे. साथ ही महागठबंधन में सीएम चेहरा को लेकर उपजे हालात से रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी नाराज चल रहे थे और बाद में उन्होंने भी महागठबंधन छोड़ने का एलान कर दिया.

ऐसे में अब महागठबंधन में कांग्रेस, आरजेडी, माले, सीपीआई, सीपीएम  पार्टी ने एक मजबूत गठबंधन के लिए एक साथ आने का निर्णय लिया है. इन दलों ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महगठबंधन चुनाव लड़ने का एलान करते हुए साफ कर दिया है कि तेजस्वी बिहार में महागठबंधन से सीएम पद के उम्मीदवार होंगे. वहीं, एनडीए से लोजपा के अलग होने के साथ ही भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि एनडीए बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और परिणाम आने के बाद नीतीश कुमार ही एक बार फिर से सीएम बनेंगे.

चुनाव से पहले बिहार में बदलते इस सियासी समीकरण पर सभी की निगाहें जा टिकी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सूबे में दलित और अतिपिछड़ा वोट बैंक का चुनाव में निर्णायक असर दिखेगा. बड़ा सवाल यह है कि एनडीए से लोजपा के जाने और जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी के शामिल होने से भाजपा-जदयू गठबंधन को कितना फायदा तथा महागठबंधन को कितना नुकसान पहुंचेगा. उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव के लिए इस बार तीन चरण में वोटिंग होगी. जबकि, 10 नवंबर को नतीजे आयेंगे.


Find Us on Facebook

Trending News