भ्रष्ट अफसरों पर एक्शन कब ? 107 युवक-युवतियों की जिंदगी को नरक बनाने के जिम्मेदार चैन से कर रहे नौकरी, वेतन की मांग को लेकर दर-दर भटक रहे शिक्षक

भ्रष्ट अफसरों पर एक्शन कब ? 107 युवक-युवतियों की जिंदगी को नरक बनाने के जिम्मेदार चैन से कर रहे नौकरी, वेतन की मांग को लेकर दर-दर भटक रहे शिक्षक

PATNA: बिहार के भ्रष्ट अफसरों ने 107 नौजवान युवक-युवतियों की जिंदगी को नरक बना दिया है। बेचारे युवक-युवती बर्बाद हो गए। बर्बादी किसी दूसरे ने नहीं बल्कि सुशासन राज के भ्रष्ट अफसरों ने की है. नौजवानों की जिंदगी को नरक बनाकर रिश्वतखोर अफसर चैन से नौकरी कर रहे. दूसरी तरफ बेचारा बने नौजवान न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे. आखिर नौजवानों का कसूर क्या था ? अगर भ्रष्ट अफसर बिना रिक्ति शिक्षक बहाली नहीं निकालते तो फिर ये लोग जाल में नहीं फंसते. 

वारिसलीगंज के तत्कालीन बीडीओ ने 107 लोगों की जिंदगी से खेला 

आज बात 107 नियोजित शिक्षकों की. नवादा के वारसलीगंज प्रखंड नियोजन इकाई ने 2018 में 107 शिक्षकों की ज्वाइनिंग कराई. इसके पहले नियोजन इकाई जिसके सचिव वारसलीगंज के बीडीओ थे, उन्होंने नियुक्ति के लिए रिक्ति निकाली. इसके बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई। शिक्षक अभ्यर्थियों ने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए अंत तक पहुंचे. इसके बाद नियोजन इकाई के सचिव वारिसलीगंज के बीडीओ ने इन सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया. सभी शिक्षक 1 नवंबर 2018 को विभिन्न विद्यालयों में योगदान दिए। इसके बाद 10 मई 2020 तक सब कुछ ठीक रहा. इस दौरान इन शिक्षकों ने स्कूल में हाजिरी बनाई. सरकार ने चुनावी ड्यूटी लिया. मई 2020 के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी नवादा की तरफ से हाजिरी बनाने पर रोक लगा दी गई। सभी शिक्षक स्कूल में बच्चों को पढ़ाते रहे, हाजिरी बनाते रहे, सरकार ने चुनावी ड्यूटी ली, लेकिन वेतन का भुगतान नहीं हुआ। वेतन भुगतान की मांग को लेकर ये शिक्षक प्रयासरत्त रहे.

वेतन भुगतान को लेकर दर-दर की ठोकर खा रहे शिक्षक 

नवादा के वारिसलीगंज नियोजन इकाई के सभी 107 शिक्षक वेतन भुगतान की मांग को लेकर दर-दर की ठोकरे खाते रहे. न्याय नहीं मिला तो लोग कोर्ट पहुंच गए। इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने पटना उच्च न्यायालय के जांच कर वेतन भुगतान संबंधी आदेश के बाद पूरे मामले की जांच की. डीईओ ने 18 अगस्त 2020 को आदेश जारी किया. जिसमें कहा गया कि नियोजन इकाई ने बिना रिक्ति के ही 107 शिक्षकों का नियोजन किया है. इसके लिए नियोजन इकाई पूर्ण रूप से जिम्मेदार है. डीईओ के पत्र में कहा गया कि प्रखंड नियोजन इकाई वारिसलीगंज के द्वारा अवैध रूप से द्वितीय शिक्षक नियोजन वर्ष 2008 के नाम पर बिना रिक्ति 107 शिक्षकों का नियोजन किया है . यह नियोजन जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार नवादा के एक पत्र को आधार बनाकर किया गया. जबकि जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार नवादा के द्वारा 29 मई 2012 को पारित आदेश में सिर्फ सात अभ्यर्थी को ध्यान में रखते हुए विभाग से अनुमति प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश दिया था. लेकिन वारिसलीगंज नियोजन इकाई ने नियम की अनदेखी करते हुए एवं मनमाने पूर्ण ढंग से बिना रिक्ति के ही 107 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी. जिसके लिए प्रखंड नियोजन इकाई वारिसलीगंज पूरी तरह से दोषी हैं. नियोजन इकाई द्वारा किए गए 107 शिक्षकों की नियुक्ति अवैध है. इस वजह से इनके वेतन भुगतान करने पर राजकोष को क्षति होगी .

बिना रिक्ति के बहाली करने वाले बीडीओ पर एक्शन नहीं 

पीड़ितों का कहना है कि जिस समय हमलोगों की बहाली हुई उस समय नियोजन इकाई के सचिव व वारिसलीगंज के बीडीओ शंभु चौधरी थे.वहीं एक और बीडीओ सत्यनारायण पंडित पर भी गड़बड़ी का आरोप है। जबकि नवादा डीईओ सुरेश चौधरी थे. वहीं जिस डीईओ ने बहाली को गलत करार दिया वो डीईओ वर्तमान में सचिवालय में पदस्थापित हैं. पीड़ित शिक्षक रविशंकर शर्मा ने बताया कि हमलोगों से नौकरी बचाने के नाम पर बड़ी रकम मांगी गई थी. हमलोग पैसा देने में असमर्थ हो गए तो बहाली को अवैध बता दिया गया. आखिर हमलोगों का कसूर क्या है...। अगर रिक्ति नहीं थी तो बहाली करने के जिम्मेदार नियोजन इकाई के सचिव पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. लेकिन उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. वे नौकरी कर रहे और हमलोग दर-दर भटक रहे. अगर कार्रवाई होनी चाहिए तो सबसे पहले नियोजन इकाई के सचिव रहे तत्कालीन बीडीओ शंभु चौधरी पर.  

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