बिहार के सत्ताधारी विधायकों की 'वेदना' सुनेगी सरकार? विस चुनाव के बाद पहली दफे बड़े स्तर पर होना है अफसरों का ट्रांसफर-पोस्टिंग

बिहार के सत्ताधारी विधायकों की 'वेदना' सुनेगी सरकार? विस चुनाव के बाद पहली दफे बड़े स्तर पर होना है अफसरों का ट्रांसफर-पोस्टिंग

PATNA: बिहार में जून का महीना ट्रांसफर-पोस्टिंग का होता है। हर साल इस महीने के अंत-अंत तक बड़े स्तर पर सरकारी अधिकारियों का ट्रांसफर किया जाता है। सभी विभागों में छोटे से लेकर बड़े अधिकारी जिनका कार्यकाल पूरा होता है या फिर प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण-पदस्थापन किया जाता है। पंद्रह जून के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग की कार्रवाई शुरू हो जाती है। इसके पहले विभागीय स्तर पर तैयारी और अनुशंसा ली जाती है। विधायक अपने क्षेत्र में मनपसंद-काम करने वाले अधिकारियों की तैनाती को लेकर मंत्री से सिफारिश करते हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई ऐसे विधायक होते हैं जिनकी अनुशंसा सरकार सुन लेती है तो कई ऐसे विधायक भी होते हैं जिनकी सिफारिश नहीं सुनी जाती । 

विस चुनाव के बाद पहली दफे बड़े स्तर पर होना है ट्रांसफर-पोस्टिंग

2020 विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार बनी है। तब से बड़े स्तर पर अधिकारियों का ट्रांसफऱ नहीं  किया गया था। चुनाव जीतकर आने वाले विधायकों खासकर सत्ताधारी विधायकों की चाहत होती है उनके अंचल-ब्लॉक-अनुमंडल में उनकी पसंद का अफसर हो। चुनाव के बाद पहली दफे बड़े स्तर पर अधिकारियों का ट्रांसफऱ किया जा रहा है। सत्ता पक्ष के अधिकांश विधायकों ने अपने ब्लॉक-अँचल और अनुमंडल में काम करने वाला-मनपसंद अफसर की तैनाती को लेकर मंत्री से सिफारिश की है। 

विधायकों की वेदना सुनेगी सरकार ? 

2020 चुनाव से पहले ही नीतीश सरकार ने बड़े स्तर पर अधिकारियों का स्थानांतरण किया था। उस समय की परिस्थिति के अनुरूप अधिकारियों को तैनात किया गया था। चुनाव हुए सात महीने से अधिक बीत गए । अब तक बड़े स्तर पर सरकारी अधिकारियों को इधर-उधर नहीं किया गया है। यानी नये विधायकों के पसंद के अफसर की तैनाती अब तक नहीं हुई। कई सत्ताधारी विधायक कहते हैं कि पहले के जो अधिकारी तैनात हैं वे काम में दिलचस्पी नहीं ले रहे। वे सुनते ही नहीं हैं। इस वजह से क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा और सरकार की बदनामी हो रही। जून का महीना ट्रांसफऱ-पोस्टिंग का महीना होता है. लिहाजा सत्ताधारी विधायकों ने विस क्षेत्र में तेजतर्रार या मनपसंद अधिकारियों की पोस्टिंग के लिए अपनी सिफारिश मंत्री को दी है। लेकिन क्या विधायकों की वेदना को सरकार सुनेगी? क्या विधायकों की सिफारिश पर ब्लॉक-अंचल या अनुमंडल में अधिकारी तैनात किये जायेंगे? सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने कहा कि सरकार विधायक की अनुशंसा पर डीएम-एसपी तो पदस्थापित करती नहीं । हमने सीओ-बीडीओ-एसडीओ के लिए सिफारिश की है। अगर सरकार हमारी वेदना नहीं सुनेगी तो फिर काम कैसे होगा? 

राजस्व विभाग ने नहीं सुनी सत्ताधारी विधायक की सिफारिश

दरअसल हर विधायक की कोशिश होती है कि उनके विस क्षेत्र जिसमें 2-3 अंचल-ब्लॉक होते हैं वहां पसंद के सीओ-बीडीओ की तैनाती हो। जून महीने में विधायक मंत्री के समक्ष मनपसंद बीडीओ-सीओ की पदस्थापन को लेकर सिफारिश करते हैं। इस बार अभी बीडीओ का ट्रांसफर नहीं हुआ है। लेकिन राजस्व विभाग ने सीओ का छोटे स्तर पर ही तबादला किया है। शुक्रवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 20 अँचलों में नए सीओ की पदस्थापना की है। लेकिन राजस्व विभाग ने सीओ के ट्रांसफर में सत्ताधारी विधायक की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। सीतामढ़ी से भाजपा विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार ने साफ कहा है कि तबादलों का घृणित दौर है। उन्होंने कहा कि विधायक स्थानीय जनप्रतिनिधि होता है। ऐसे में बीडीओ,सीओ और थानेदार की तैनाती में विधायक की सिफारिश माननी चाहिए। एक तरफ ग्रामीण विकास मंत्री कहते हैं कि हर विधायक अपनी जाति-समाज के बीडीओ का प्रस्ताव दे रहा। हम कहते हैं कि जाति का अफसर नहीं बल्कि काम करने वाला और जानकार अधिकारी की पदस्थापना की सिफारिश करनी चाहिए। हमने अपने विस सीतामढ़ी के डुमरा अंचल के लिए राजस्व विभाग से एक तेजतर्रार अफसर की सिफारिश की. लेकिन हमारी सिफारिश को दरकिनार कर उसी अंचल में पदस्थापित राजस्व अधिकारी जो काम लायक नहीं उसे ही डुमरा अँचल में पदस्थापित कर दिया गया। हमारी सिफारिश पर विभाग ने काम नहीं किया। ऐसे में क्या कहा जाये? क्या इसे तबादलों का घृणित दौर नहीं कहेंगे? भाजपा विधायक ने साफ कहा कि अपनी जाति के अफसर की सिफारिश करना और विधायकों की सिफारिश के बाद भी उस अफसर की पोस्टिंग नहीं करना दोनों ही घृणित है। हालांकि भाजपा विधायक ने कहा कि हमारी सिफारिश को खारिज कर दिया गया यह अभी नहीं कह सकते. विभाग ने किन परस्थितियों ने ऐसा किया यह जानकारी लेने के बाद ही कहा जा सकता है। बता दें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बीजेपी के पास है। भाजपा विधायक रामसूरत राय इस विभाग के मंत्री हैं। इसके बाद भी बीजेपी विधायक की सिफारिश को खारिज कर दिया गया। 

20 अंचलों में सीओ की पदस्थापना   

बता दें कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 20 अँचलों ने नए सीओ को तैनात किया है। इन 20 अंचलों में भाजपा विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार का विस क्षेत्र डुमरा अंचल भी शामिल है। विधायक ने किसी दूसरे सीओ के नाम की सिफारिश की थी। लेकिन विभाग ने उसी अंचल के राजस्व अधिकारी चंद्रजीत प्रकाश को सीओ के पद पर पदस्थापित कर दिया है। विभाग के इस निर्णय से सत्ताधारी विधायक काफी दुःखी हैं। इसके बाद उनका दर्द झलक गया और ट्वीटर पर तबादलों पर सवाल उठा दिये। बीजेपी विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार ने कहा कि सदन के सदस्य के नाते मूल्याधिष्ठित राजनीति के विचारधारा के व्यक्ति होने के नाते मन के प्रश्न कभी कभी मन को ही झकझोर देते हैं। क्या हम सब मूल्यों पर आधारित जन सेवा कर रहें है? क्या स्थानीय जनप्रतिनिधि गैर विचारधारा वाले मंत्री से ही जनता का हर काम करवायेंगे? व्यथित भाजपा विधायक आगे लिखते हैं ..तबादलों का घृणित दौर

सत्ताधारी विधायकों को सता रहा डर

अंचलाधिकारियों की पदस्थापना में सत्ताधारी दल भाजपा विधायक की सिफारिश खारिज होने की खबर मीडिया में आने के बाद अब रूलिंग पार्टी के विधायकों को डर सताने लगा है। उन्हें लगने लगा है कि ग्रामीण विकास विभाग-राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग हमारी सिफारिश को खारिज कर कहीं हाई सेटिंग वाले अधिकारियों की तैनाती न कर दे। क्यों कि बिहार में अधिकारियों के स्थानांतरण में बड़े स्तर पर खेल होता है।

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