2021 में बिहार में सरकार के नए फैसले से करीब 150 नए बाजार हाेंगे गुलजार, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

2021 में बिहार में सरकार के नए फैसले से करीब 150 नए बाजार हाेंगे गुलजार, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

डेस्क... साल 2020 भले ही कोरोना के गाल में समा गया हो, लेकिन 2021 से लोगों को बहुत उम्मीदें हैं। बिहार में 2021 में नए एनडीए की सरकार से लोगों को बहुत उम्मीद हैं। इस बार चुनाव में सबसे अधिक महत्वपूर्ण मामला जो उछला वो था रोजगार और यही रोजगार प्रदान करने में पूरी तन्यमयता के साथ बिहार सरकार लगी भी है। इतना ही नहीं सूबे के कई क्षेत्रों को शहरीकरण में तब्दील करने के लिए नीतीश सरकार ने जो फैसले लिए हैं, उन्हें अमलीजामा भी पहनाने की पुरजोर कोशिश होगी। 

बिहार में सरकार के नए फैसले से करीब 150 नए बाजार गुलजार होंगे और साथ ही ये नए शहर बिहार में विकास को और रफ्तार देंगे। राज्य कैबिनेट में नए शहरी निकायों के गठन को मंजूरी दी जा चुकी है। अब उन्हें जमीनी आकार देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन नए शहरों का असर सीधे तौर पर बिहार की सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक गतिविधियों पर दिखेगा। देश में शहरीकरण की दौड़ में पिछड़े बिहार ने इस दिशा में आगे जाते हुए साल में एक बड़ी छलांग लगाई है। इस कदम का असर नए साल में दिखने लगेगा।
 
शहरीकरण का आंकड़ा सबसे कम था, इस साल बढ़ जाएगा
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में शहरीकरण का आंकड़ा अभी तक सिर्फ 11.27 प्रतिशत था। जो देश में सबसे कम है। राष्ट्रीय औसत 31.16 प्रतिशत है। नए शहरों के आकार लेने से राज्य में शहरीकरण करीब 20 प्रतिशत हो जाएगा। निकाय बनने पर राज्य में शहरी इलाकों का विस्तार होगा। उन इलाकों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। राज्य सरकार के साथ ही केंद्र की विभिन्न योजनाओं का लाभ इन शहरों को मिलेगा।
 
नागरिक सुविधा बढ़ेगी
राज्य सरकार ने लंबे समय बाद बड़े पैमाने पर ग्राम पंचायतों को विघटित कर नए शहरों के गठन को मंजूरी दी है। 117 नए नगर पंचायत हैं। जबकि आठ ग्राम पंचायतों को सीधे नगर परिषद बना दिया गया है। राज्य में नगर निगमों की संख्या भी 12 से बढ़कर 18 हो गई हैं। नए शहरी निकाय बनने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति और तेज होगी। संबंधित क्षेत्रों में सुनियोजित ढंग से विकास होगा। नागरिक सुविधा बढ़ेंगी। पानी, बिजली, सड़क, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, सफाई सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
 
रोजगार के मौके बढ़ेंगे
 
शहरों को विकास का वाहक माना जाता है। विकास होगा तो ऐसे इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जमीन की कीमतों में भी वृद्धि होगी। वित्त आयोग से शहरी निकायों को गांव की अपेक्षा ज्यादा अंशदान मिलेगा। राज्यांश और केंद्रांश से मिलने वाली हिस्सेदारी से इन शहरों को चमकाया जाएगा।

कैबिनेट मीटिंग में फैसलाये हैं प्रस्तावित नगर परिषद
हाल ही में आयोजित नीतीश कुमार की कैबिनेट बैठक में बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में 103 नए नगर पंचायत और 8 नए नगर परिषद के निर्माण को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही 32 नगर पंचायत का नगर परिषद में अपग्रेडेशन करने की मंजूरी मिली है। 12 नगर निकायों के विस्तारीकरण और 5 नगर परिषद को नगर निगम के रूप में अपग्रेडेशन की भी मंजूरी दी गई।
 
नीतीश सरकार ने जिन नए नगर परिषद को बनाने का फैसला लिया है उनमें पटना जिले के बिहटा नगर परिषद, पटना में सम्पतचक नगर परिषद, बेगूसराय में बरौनी नगर परिषद, मधेपुरा में उदाकिशनुगंज, सुपौल के त्रिवेणीगंज, समस्तीपुर में ताजपुर नगर परिषद, समस्तीपुर में शाहपुर पटोरी, लखीसराय के सूर्यगढ़ा नगर परिषद का नाम शामिल है।
 
नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड पर फैसला
नगर परिषद को नगर निगम के रूप में अपग्रेड को लेकर जिन्हें मंजूरी मिली है उनमें रोहतास का सासाराम नगर निगम, पूर्वी चंपारण में मोतिहारी नगर निगम, पश्चिमी चंपारण के बेतिया नगर परिषद में बेतिया नगर निगम, मधुबनी में मधुबनी नगर निगम, समस्तीपुर में समस्तीपुर नगर निगम में अपग्रेड करने को मंजूरी दी गई है। वहीं, बिहार में 2021 में पंचायत चुनाव होने हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक में कई फैसलों को मंजूरी दी। सूबे में नई सरकार के गठन के बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार प्रदेश के विकास को लेकर जरूरी फैसले ले रहे हैं।


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