सिंदूर की होली खेलकर महिलाओं ने दी माँ को विदाई, पति के लम्बी उम्र के लिए की प्रार्थना

सिंदूर की होली खेलकर महिलाओं ने दी माँ को विदाई, पति के लम्बी उम्र के लिए की प्रार्थना

NAWADA : जिले की एकमात्र रेलवे कॉलोनी में बंगाली रीति रिवाज के साथ पूजा अर्चना किया जाता है। इसी कड़ी में आज विजयादशमी के दिन मां की विदाई के समय महिलाओं के द्वारा सिंदूर होली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माँ की आरती करने के बाद महिलाओं ने सिंदूर की होली खेली है। इस तरह 72 साल पुरानी परंपरा का बंगाली समाज ने निर्वहन किया। बंगाली समाज की महिलाओं ने मां को समर्पित होने वाले सिंदूर को अपनी मांग में भरकर एक दूसरे के गालों को सिंदूर से रंग दिया। विसर्जन से पहले पंडालों में सिंदूर खेला के दौरान पूरा माहौल सिंदूरमयी हो गया। मान्यता है कि ऐसा करने से पति की उम्र लंबी होती है। माता को मिठाई खिलाने के बाद नम आंखों से उनको विदाई दी गई। समाज के अध्यक्ष चंद्रिका यादव के अनुसार मान्यता है कि मां दुर्गा की मांग भर कर उन्हें मायके से ससुराल विदा किया जाता है।

वहीँ छपरा के कालीबाड़ी मंदिर में भी वर्षो से मनाए जा रहे दुर्गा उत्सव पर बंगाली महिलाओं ने आज एक दूसरे को सिंदूर लगाकर व प्रसाद खिला कर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। साथ ही देश प्रदेश की सुख शांति का मां से आशीर्वाद लिया। पंचमी से शुरू हुए उत्सव के समापन पर मां दुर्गा की पूजा अर्चना के बाद माता को विसर्जन के लिए विदा किया गया। इस मौके पर बंगाली समाज की महिलाओं ने माता का श्रृंगार किया व परिवार के सुख शांति का आशीर्वाद मांगा। 

बंगाली महिलाओं का मानना है कि नवरात्र के मौके पर नौ दिन मायके में रहने के बाद आज माता को ससुराल के लिए विदाई दी जाती है। इसलिए आज के दिन नाच गाकर और सिंदूर की होली खेल कर माता को विदाई दी गई है। छपरा कालीबाड़ी मंदिर कमेटी के सदस्या सुजाता चटर्जी ने बताया कि नवरात्र के मौके पर बंगाली समुदाय के लोग हर वर्ष पंचमी से मां दुर्गा पूजा का उत्सव मनाते हैं। मां की प्रतिमा बनाकर विजयादशमी तक माता की पूजा अर्चना करते हैं। आज विजयदशमी पर मां दुर्गा की अपने मायके से ससुराल वापसी होती है, जिस अवसर पर बंगाली महिलाएं नाच गाकर खुशियां मनाती है। सिंदूर खेला (सिंदूर की होली) खेल कर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

उधर मां दुर्गा को बेटी मानकर कटिहार के ग्रीनसोप पारा दुर्गा मंदिर में महिलाओं ने मां को मिठाई खिलाकर आपस में सिंदूर खेलकर खुशी- खुशी माँ दुर्गा को अगले वर्ष जल्दी आने के वादे के साथ विदाई दिया। दरअसल दशहरे के मौके पर कटिहार के बंगाली बहुल ग्रीनसोप पारा में ये परंपरा बेहद पुराना है। इसका निर्वहन करते हुए महिलाएं आज भी एक दूसरे को सिंदूर लगाकर मिठाई खिलाकर दशहरा के मौके पर मां दुर्गा को विदाई देती हैं। कटिहार के मां दुर्गा के विदाई उत्सव का यह जश्न बेहद खास है।

नवादा से अमन, छपरा से शशि और कटिहार से श्याम की रिपोर्ट 


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