महिलाओं को सिंदूर और बिंदी लगाना पड़ सकता है भारी, एम्स करेगा जाँच

महिलाओं को सिंदूर और बिंदी लगाना पड़ सकता है भारी, एम्स करेगा जाँच

जब भी सिंदूर और बिंदी में मौजूद घातक तत्वों पर बहस होना शुरू होता है, लोग इसे धर्म के चश्मे से देखने लगते हैं।हिन्दू महिलाओं के लिए शादी के बाद उसके सोलह श्रृंगार अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा में सोलह श्रृंगार का उल्लेख अच्छे से किया गया है। विवाह के बाद महिलाओं को सोलह श्रृंगार का प्रत्येक रूप से धारण करना अनिवार्य है। ऐसे में क्या आप सोच सकते हैं कि इस सोलह श्रृंगार के दो महत्वपूर्ण अंग एक महिला के लिए काफी हानिकारक भी हो सकते हैं?

 

दरअसल आपको बता दें कि  बिंदी और सिंदूर की जाँच अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान यानि कि एम्स द्वारा की जाएगी। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ हानिकारक तत्व पाएं जाते हैं, जसकी जाँच अब एम्स द्वारा की जाएगी।  हाल ही  में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एम्स और देश के कई बड़े सरकारी संस्थानों के त्वचा रोग विशेषज्ञयों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास कई सारे मामले ऐसे आए हैं, जिसमें महिलाओं की त्वचा सिंदूर और बिंदी से इतनी खराब हो गई कि उसका समाधान ऑपरेशन से ही करना पड़ा। 


बताया जा रहा है कि सिंदूर और बिंदी में एजीडाई नामक एक ऐसा रासायनिक तत्व है, जो न सिर्फ त्वचा को भीतर से जलाकर पतला करता है बल्कि कई बार एलर्जेंट का भी काम करता है।आज छोटे शहरों में भी बिंदी और सिंदूर का निर्माण हो रहा है. इसे लेकर न ही किसी तरह का नियम है न कानून. यही कारण है कि सिंदूर और बिंदी जैसे प्रोडक्ट में एजीडाई नामक घातक तत्व मिलाया जा रहा है. एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि सिंदूर और बिंदी का असर त्वचा पर पड़ रहा है।  


डॉक्टरों का कहना है कि हर्बल उत्पाद, मेंहदी आदि में इन रासायनिक तत्वों की जांच के लिए दिल्ली और अन्य राज्यों से 55 सैंपल एकत्रित किए गए हैं. इन सैंपल की जांच चल रही है. अगले महीने एम्स पूरी दुनिया के सामने हर्बल उत्पादों की सच्चाई सामने लेकर आएगा. डॉक्टरों का कहना है कि यहां तक की बालों की डाई, मेहंदी में पीपीडी रसायन का इस्तेमाल हो रहा है. इसीलिए एम्स के शोध में आईआईटी रुड़की और ऋषिकेश एम्स की मदद ली गई है.

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