योगी बनाम नीतीशः यूपी CM खुद ले रहे कोविड अस्पताल से लेकर गांव तक का जायजा तो बिहार के CM ने 'मंत्रियों' के घूमने पर ही लगा दी पाबंदी

योगी बनाम नीतीशः यूपी CM खुद ले रहे कोविड अस्पताल से लेकर गांव तक का जायजा तो बिहार के CM ने 'मंत्रियों' के घूमने पर ही लगा दी पाबंदी

PATNA: देश के दो बड़े राज्य कोरोना जैसी महामारी से त्राहिमाम कर रहे हैं। प्रतिदिन लोग इस महामारी के चपेट में आकर काल के गाल में समा रहे हैं। दर्द का अंतहीन सिलसिला जो शुरू हुआ है वह रूकने का नाम नहीं ले रहा। न जाने कितने परिवार उजड़ गये, न जाने कितने बच्चे अनाथ हो गये,न जाने कितने बाप के बुढ़ापे की लाठी छीन गई,न जाने कितने बुर्जुग कंधे जवान बेटे की लाश ढोने को विवश हो गये,न जाने कितनी मातायें अपने लाल के चेहरे को देखने को तरस गईं। समाज दर्द के समंदर में डुबकियां खाने को विवश है. जनता नेतृत्व की तरफ टकटकी लगाकर देख रही है. इस विपरीत परिस्थिति में देश के दो बड़े राज्यों (बिहार-उत्तर प्रदेश) के मुख्यमंत्रियों की कार्यकुशलता अलग-अलग ढंग से सामने आई है जो पूरे देश में बहस का मुद्दा बन गया है। 

दोनों राज्यों में बीजेपी या गठबंधन की सरकार 

गौरतलब है कि कोरोना के इस भीषण महामारी में जब जनता त्राहिमाम कर रही है,अंतिम आशा नेतृत्व पर आकर टीक गई है उस दौरान दोनों राज्यों (बिहार-उत्तर प्रदेश)  में बीजेपी या गठबंध की सरकार सत्ता में है। लेकिन इस आपदा काल में दोनों राज्यों के नेतृत्व में एक बड़ा फर्क देखने को मिल रहा है। जहां एक राज्य के मुख्यमंत्री कोरोना पॉजिटिव होने के बाद दुगुनी ताकत के साथ खुद अस्पतालों-कोविड सेंटर सहित कोरोना संक्रमित मरीजों के घर तक दस्तक देकर उनके दर्द को समझने की कोशिश में हर दिन जुटे हैं। आज सोमवार को भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में जिला हाॅस्पिटल एवं कोविड वैक्सीन सेंटर का निरीक्षण किया है। वहीं दूसरे बड़े राज्य बिहार के मुख्यमंत्री के खुद भ्रमण-निरीक्षण की बात तो छोड़ दीजिए,उन्होंने तो अब अपने मंत्रियों के द्वारा किये जा रहे अस्पताल-कोविड सेंटर,सामुदायिक रसोई के निरीक्षण एवं भ्रमण पर पाबंदी लगा दी है। अब सिर्फ जरूरत के मुताबिक मंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से व्यवस्था का जायजा लेंगे। धरातल पर जाकर ग्राउंड रिपोर्ट की जानकारी लेने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। व्यवस्था का जिम्मा अब पूरी तरह से अफसरों के हवाले कर दी गई है। मंत्रियों के भ्रमण पर रोक लगाने के पीछे मुख्यमंत्री का तर्क है कि उनके क्षेत्र भ्रमण से लॉकडाउन का उलंघन हो रहा था। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से कैबिनेट के कई मंत्री निराश हैं । चूंकि जनता जिस दर्द में है,उसे सहानुभूति देने के लिए दूर-दूर तक कोई खड़ा नहीं दिखता। इस स्थिति में नेतृत्व अगर दिलासा देता तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती थी।  

बिहार में सबकुछ अधिकारियों के हवाले

यह बड़ा सवाल है कि आखिर एक राज्य का नेतृत्व बिल्कुल निडरता के साथ राज्य में लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करवाते हुए खुद अस्पतालों-कोविड सेंटरों व कोरोना संक्रमितों के घऱ जाकर फीडबैक ले रहा है.दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिदिन कोरोना पर फीडबैक लेकर आगे का निर्णय लेते हैं।जबकि इस दौरान यह शिकायत भी सामने आ चुकी है कि अधिकारी मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए आँकड़ों और व्यवस्था का खेल खेलकर गुमराह कर रहे हैं। सामुदायिक रसोई और अस्पतालों की व्यवस्था का कलई खुलकर सामने आ चुका है। इतना ही नहीं पटना हाईकोर्ट ने न जाने कितनी बार कोरोना काल की चिकित्सीय व्यवस्था को लेकर बिहार सरकार को फटकार लगा चुका है। 

मंत्रियों पर रोक से जनप्रतिनिधियों की भूमिका खत्म

वरिष्ठ पत्रकार अरूण कुमार पांडेय कहते हैं कि आपदा काल में लॉकडाउन के बहाने मंत्रियों के निरीक्षण और भ्रमण पर रोक का आदेश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री के इस आदेश से जनप्रतिनिधियों की भूमिका को खत्म कर दिया गया है। अब पूरी व्यवस्था नौकरशाहों के हवाले हो गई है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और लॉकडाउन की आड़ में विपक्ष के नेताओं की भूमिका को भी लगवाग्रस्त कर दिया है। जाहिर सी बात है जब विपक्षी नेता अस्पताल,कोविड सेंटर और सामुदायिक रसोई पर जाते तो सुशासन की व्यवस्था की कमियों को उजागर करते । बेशक इसका लाभ जनता को मिलता और सरकार को अधिकारियों की लापरवाही के बारे में सीएम को पता भी चलता। लेकिन यहां तो का पर करूं सिंगार पिया मोर आन्हर.......वाली स्थिति है। अब तो सारी जवाबदेही ही नौकरशाहों के कंधो पर है। काम भी उन्हे ही करना फीडबैक भी उन्हीं को देना है। यानी जब मुख्यमंत्री के आंख और कान वही हैं तो फिर व्यवस्था की कमियां उजागर कैसे होगी?  

एक हफ्ते में 32 जिलों का दौरा कर चुके हैं योगी

वहीं दूसरी तरफ कोरोना की जमीनी हकीकत जानने के लिए उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ बेहद सक्रिय हो चुके हैं। खुद एक के बाद एक मंडल और जिलों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। इतना ही नहीं सीएम योगी सीधे गांव पहुंच कर कोरोना संक्रमितों का हाल जानने में भी पीछे नहीं रह रहे। इसका नतीजा है कि पिछले एक सप्ताह में योगी आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश के 32 जिलों का दौरा कर खुद ग्राउंड रिपोर्ट जुटाया है। कोरोना काल में योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रमण कर देश भर में नजीर पेश कर रहे हैं. अगर बिहार की बात करें तो पूरे कोरोना काल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2 बार पटना के कुछ सड़कों का भ्रमण कर जायजा लेने का कोरम पूरा कर चुके हैं। वहीं अब तो भ्रमण कर रहे मंत्रियों की भी शामत आ गई है। 




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