PLFI का जोनल कमांडर कारगिल ने किया सरेंडर, 10 लाख का था इनामी, 5 जिलों की पुलिस को थी तलाश

PLFI का जोनल कमांडर कारगिल ने किया सरेंडर, 10 लाख का था इनामी, 5 जिलों की पुलिस को थी तलाश

NEWS4NATION DESK : झारखंड सरकार द्वारा नक्सलियों के लिए चलाई गई आत्मसमर्पण नीति को फिर सफलता मिली है। पीएलएफआई के जोनल कमांडर कारगिल यादव ने सरेंडर किया है। कारगिल पर सरकार ने 10 लाख इनाम रखे थे। वहीं पांच जिलों की पुलिस उसकी तलाश में थी। कारगिल यादव ने डीआईजी कार्यलय में आकर सरेंडर किया। सरेंडर करने के बाद उसने अपने साथियों से भी सरकार के आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाने की अपील की। वहीं उसने कहाकि संगठन द्वारा किसी भी गैंगरेप की घटना को अंजाम नहीं दिया गया है। खूंटी के कोचांग गैंगरेप में पीएलएफआई का हाथ नहीं है। बल्कि संगठन से निकाले गए टकला उर्फ समद के द्वारा घटना को अंजाम दिया गया। 

1999 में नक्सील संगठन किया था ज्वाइन

कारगिल यादव ने साल 1999 में नक्सली संगठन ज्वाइन किया। बाद में पीएलएफआई का सदस्य बन गया। वर्तमान में उसके गतिविधि का क्षेत्र रांची के चान्हो, मांडर, मैकलुस्कीगंज, लोहरदगा के कैरो और सिमडेगा का बानो इलाका था। उसपर लातेहार के बालूमाथ और पलामू के लेस्लीगंज थाने में मामले दर्ज हैं।

टीपीसी से लोहा लेने के लिए PLFI में हुआ शामिल
 साल 2003 में वह पुलिस के हत्थे चढ़ा था। जेल से छूटने के बाद उसने टीपीसी से लोहा लेने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ लोरिक सेना का गठन किया। लेकिन कारगिल को लगा कि वह टीपीसी से अकेले नहीं निपट पाएगा, इसलिए खूंटी के रनिया जंगल में पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप के सामने वह संगठन में शामिल हो गया। बाद में उसे संगठन में जोनल कमांडर बनाया गया।

वहीं डीआईजी अमोल वेणुकान्त होमकर ने कहा कि मुख्यधारा से गुमराह हुए अन्य नक्सलियों को भी नयी आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटना चाहिए। रांची के एसएसपीअनीस गुप्ता ने कहा कि कालगिल के आत्मसमर्पण से पीएलएफआई कमजोर हुई है।

 

 

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