NEET-UG 2026 Cancelled: चूरू के 'गेस पेपर' ने कैसे कराया नीट पेपर लीक? पढ़ें घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द! राजस्थान के चूरू से निकले एक 'गेस पेपर' ने 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में डाला। जानें कैसे व्हाट्सएप और कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैला यह लीक पेपर और क्या है SOG की जांच रिपोर्ट।

NEET UG 2026 Paper Leak
चूरू के 'गेस पेपर' ने कैसे कराया नीट पेपर लीक?- फोटो : news 4 nation

भारत की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को भारी विवादों के बाद आखिरकार रद्द कर दिया गया है। 3 मई को देशभर के 551 शहरों और विदेशों के 14 केंद्रों पर करीब 22.79 लाख छात्रों ने यह परीक्षा दी थी। सुरक्षा के पुख्ता दावों के बीच आयोजित इस परीक्षा की शुचिता उस वक्त भंग हो गई, जब राजस्थान के चूरू से जुड़े एक कथित 'गेस पेपर' के तार परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से मिल गए। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद इस घोटाले ने पूरे देश के शिक्षा तंत्र को हिलाकर रख दिया है।


क्या था चूरू का वह रहस्यमयी ‘गेस पेपर’?

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में एक हाथ से लिखा हुआ दस्तावेज बरामद हुआ है, जिसे 'गेस पेपर' का नाम दिया गया था। इस दस्तावेज में कुल 410 सवाल शामिल थे। चौंकाने वाली बात यह है कि जब इसकी तुलना असली प्रश्नपत्र से की गई, तो पाया गया कि लगभग 120 सवाल सीधे तौर पर NEET-UG 2026 के पेपर में पूछे गए थे। SOG के मुताबिक, यह पेपर परीक्षा से काफी समय पहले ही बाजार में आ चुका था और छात्रों के बीच तेजी से बंट रहा था।

सवालों में समानता: 600 अंकों पर पड़ा सीधा असर

जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि परीक्षा के बायोलॉजी और केमिस्ट्री सेक्शन के सवालों में 'चौंकाने वाली समानता' देखी गई है। केमिस्ट्री के 45 सवालों के अलावा बायोलॉजी के भी दर्जनों सवाल इस गेस पेपर से मेल खा रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि इन समान सवालों की वजह से परीक्षा के कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंक प्रभावित हो रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मिल जाना किसी इत्तेफाक से कहीं ज्यादा एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।


केरल के मेडिकल छात्र से सीकर के पीजी तक का सफर

इस पेपर लीक का मास्टरमाइंड चूरू का रहने वाला एक एमबीबीएस छात्र बताया जा रहा है, जो वर्तमान में केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है। आरोप है कि उसने 1 मई को यह संदिग्ध दस्तावेज राजस्थान के सीकर में अपने एक परिचित को भेजा था। इसके बाद सीकर के एक पीजी (PG) संचालक ने इसे वहां रह रहे छात्रों तक पहुंचाया। देखते ही देखते यह गेस पेपर कोचिंग सेंटर्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से पूरे नेटवर्क में फैल गया। जांच में मिले चैट रिकॉर्ड्स पर 'Forwarded many times' का टैग इस बात की पुष्टि करता है कि यह सामग्री वायरल हो चुकी थी।


कीमत का खेल: 5 लाख से 30 हजार तक गिरा भाव

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले पूरी तरह सक्रिय हो चुका था। शुरुआती दौर में इस गेस पेपर को कथित तौर पर 5 लाख रुपये प्रति छात्र की दर से बेचा गया। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आया और पेपर अधिक लोगों तक पहुंचा, इसकी कीमत गिरकर मात्र 30 हजार रुपये तक रह गई। इस मामले में अब तक उत्तराखंड के देहरादून और राजस्थान के सीकर व झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे केंद्रीय एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।


22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में

NEET-UG परीक्षा न केवल एमबीबीएस, बल्कि बीडीएस, बीएएमएस और बीएचएमएस जैसे कोर्स में प्रवेश का एकमात्र द्वार है। इस साल 22.79 लाख छात्रों ने अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए जी-जान से मेहनत की थी, लेकिन इस घोटाले ने उनके भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। परीक्षा रद्द होने से छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश और निराशा है। अब सबकी नजरें केंद्रीय एजेंसियों की जांच और दोबारा होने वाली परीक्षा की तारीखों पर टिकी हैं।