शहर जाने की टेंशन खत्म! अब आपके गांव में ही बनेगा आयुष्मान कार्ड; कोटेदार और आशा बहुएं संभालेंगी कमान

स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान भारत योजना के तहत एक बड़ी पहल करते हुए कार्ड बनाने की प्रक्रिया को और भी सरल और सुलभ बना दिया है। अब पात्र लाभार्थियों को कार्ड बनवाने के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

शहर जाने की टेंशन खत्म! अब आपके गांव में ही बनेगा आयुष्मान क

N4N Desk - आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए अब शहरों या बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी । स्वास्थ्य विभाग ने इस सेवा को गांव और मोहल्ले के स्तर पर पहुंचा दिया है । अब आपके नजदीकी राशन डीलर, आशा बहुएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और गांव के फार्मासिस्ट भी कार्ड बना सकेंगे । इस काम को गति देने के लिए प्रशासन ने 1156 नई ऑपरेटर आईडी एक्टिव की हैं और संबंधित कार्यकर्ताओं को विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य गरीब परिवारों को बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है । योजना से जुड़े किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती होने पर एक परिवार को एक वर्ष में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है । परिवार के प्रत्येक पात्र सदस्य का अलग-अलग कार्ड बनाया जाता है, जिसे अस्पताल में दिखाने मात्र से बिना पैसे दिए इलाज शुरू हो जाता है ।

किसे मिलेगा योजना का लाभ?

सरकार का लक्ष्य हर पात्र व्यक्ति तक इस सुविधा को पहुँचाना है । इस योजना के हकदार निम्नलिखित लोग हैं। 

अंत्योदय कार्ड धारक और गरीबी रेखा से नीचे (लाल और गुलाबी राशन कार्ड) वाले परिवार ।

70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्ग

उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी (पात्रता जांच के उपरांत) ।

आयुष्मान ऐप से खुद बनाएं अपना कार्ड

डिजिटल माध्यम का उपयोग करने वाले लोग अब घर बैठे अपने मोबाइल से भी आवेदन कर सकते हैं । इसके लिए आपको 'आयुष्मान ऐप' इंस्टॉल करना होगा और मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा । आधार नंबर दर्ज करने के बाद परिवार की सूची दिखेगी, जहाँ ओटीपी और फोटो के जरिए ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी कर कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है ।

प्रशासन का विशेष अभियान और लक्ष्य

जिले में एक भी पात्र व्यक्ति इस योजना से वंचित न रहे, इसके लिए प्रशासन विशेष अभियान चला रहा है । ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदारों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ने से कार्ड बनाने की गति में तेजी आई है। तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए नई आईडी और ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है ताकि वेरिफिकेशन की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके ।