Sambhal violence report:संभल हिंसा पर आयोग की 450 पेज रिपोर्ट, साजिश, विदेशी हथियार और जनसंख्या बदलाव का खुलासा
Sambhal violence report:संभल में पिछले साल भड़की हिंसा की जांच पूरी कर तीन सदस्यीय आयोग ने मुख्यमंत्री को 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी।

Sambhal violence report:संभल में पिछले साल भड़की हिंसा की जांच पूरी कर तीन सदस्यीय आयोग ने गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कई सनसनीख़ेज़ तथ्य सामने आए हैं। आयोग ने लिखा है कि सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के भड़काऊ बयान के बाद ही माहौल बिगड़ा और हिंसा की चिंगारी भड़की।
रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। नमाज़ियों को भड़काने के लिए बाहरी लोगों को बुलाया गया। भीड़ के पास से विदेशी हथियार और कारतूस बरामद हुए, जिससे साफ़ है कि हिंसा पहले से योजनाबद्ध थी।
आयोग ने सिर्फ 24 नवंबर 2024 की घटना ही नहीं, बल्कि पिछले 78 सालों का पूरा सामाजिक इतिहास दर्ज किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आज़ादी के समय 1947 में संभल की 45% आबादी हिंदू थी, जो अब घटकर महज़ 15% रह गई है।
बार-बार के दंगे, जबरन धर्मांतरण, धार्मिक स्थलों पर कब्ज़ा और लगातार पलायन इस गिरावट की मुख्य वजह बताई गई है।
गवाहों ने आयोग को बताया कि पहले जिन जगहों पर शिव मंदिर और हरिहर मंदिर हुआ करते थे, वहां अब मस्जिद खड़ी है। इसी तरह हिंदू कुएं और धार्मिक स्थलों को बदलकर दूसरे इस्तेमाल में लिया गया। यह बदलाव धीरे-धीरे जनसंख्या के पलायन के साथ जुड़ा रहा।
रिपोर्ट में दर्ज है कि 22 नवंबर को सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने मस्जिद से भड़काऊ भाषण दिया कि “हम इस देश के मालिक हैं, नौकर और गुलाम नहीं।”
इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद में कोर्ट के आदेश पर चल रहे सर्वे की जानकारी लीक हुई। इसके बाद भारी भीड़ जुटी और दोनों पक्षों में टकराव शुरू हो गया। देखते ही देखते पथराव और फायरिंग हुई। हिंसा में चार लोगों की मौत और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।
आयोग ने माना कि यदि प्रशासन पहले से अलर्ट होता तो इतनी बड़ी हिंसा को रोका जा सकता था। फिलहाल जुमे की नमाज़ को लेकर संभल में हाई अलर्ट है। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और पुलिस ने साफ़ किया है कि किसी भी अराजक तत्व को बख़्शा नहीं जाएगा।