पास कर दीजिए सर, अगली बार पक्का पढ़ूंगा! यूपी बोर्ड की कॉपियों में निकले मजेदार संदेश
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन इन दिनों तेजी से जारी है. इस दौरान छात्रों की आंसर सीट में लिखी इमोशनल लाइनें शिक्षकों का ध्यान खींच रही हैं.
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन इन दिनों पूरे प्रदेश में जोरों पर है। गाजीपुर जिले के पांच केंद्रों पर सैकड़ों शिक्षक दिन-रात इस कार्य में जुटे हुए हैं। मूल्यांकन के दौरान अक्सर शिक्षकों को ऐसी कॉपियां मिल रही हैं, जिन्हें देखकर वे अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे। परीक्षार्थियों ने पास होने के लिए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में जवाबों के बजाय भावनात्मक संदेश और अजीबोगरीब मिन्नतें लिखी हैं।
'70 नंबर दे देना सर...' : दिलचस्प और मजेदार मैसेज
कॉपियां जांच रहे शिक्षकों के लिए सबसे चर्चा का विषय एक छात्र की वह उत्तर पुस्तिका रही, जिसमें उसने अपनी पारिवारिक स्थिति का हवाला देते हुए लिखा, "सर मुझे कम से कम 70 नंबर दे देना, नहीं तो मेरी सौतेली मां मुझे मारेगी।" इतना ही नहीं, कुछ अन्य कॉपियों में फिल्मी अंदाज भी देखने को मिला, जहाँ एक छात्र ने लिखा, "बड़े-बड़े देशों में छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं, सर इतना ही आता है, कृपया पास कर दीजिए।" वहीं कुछ छात्रों ने भविष्य में कड़ी मेहनत करने का वादा करते हुए इस बार ग्रेस मार्क्स की गुहार लगाई है।
गाजीपुर में मूल्यांकन की स्थिति और छात्र संख्या
गाजीपुर जिले में इस वर्ष परीक्षाओं का आयोजन काफी बड़े स्तर पर हुआ था। 18 फरवरी से 12 मार्च तक चली इन परीक्षाओं में लगभग 1.40 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए, जबकि करीब 6 हजार छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। वर्तमान में मूल्यांकन कार्य अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन ने गोपनीयता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है, जिसके चलते यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है कि किस क्षेत्र की कॉपियां किस केंद्र पर जांची जा रही हैं।
पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी की निगरानी और कड़े मानक
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह के अनुसार, गाजीपुर में कुल 8 लाख कॉपियों का मूल्यांकन होना है, जिसमें से अब तक लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कॉपियों में लिखे इमोशनल संदेशों या अपीलों का मूल्यांकन पर कोई असर नहीं पड़ता है; शिक्षकों को केवल निर्धारित मानकों और छात्र द्वारा लिखे गए सही उत्तरों के आधार पर ही अंक देने के निर्देश दिए गए हैं।