बंगाल में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन: मतदाता सूची कार्य में लापरवाही पर 7 अधिकारी सस्पेंड, मुख्य सचिव को कड़े निर्देश
बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन! 🚫 मतदाता सूची (SIR) के काम में लापरवाही और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में 7 अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। मुख्य सचिव को 17 फरवरी तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का आदेश
N4N Desk - पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने प्रशासनिक मशीनरी में मचे हड़कंप को और तेज कर दिया है। 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया में कर्तव्यहीनता, सत्ता के दुरुपयोग और गंभीर कदाचार के आरोपों में आयोग ने राज्य के सात सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (AEROs) को तत्काल निलंबित कर दिया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए अधिकारियों में मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगना, पश्चिम मेदिनीपुर और जलपाईगुड़ी जिलों के अधिकारी शामिल हैं। निलंबित अधिकारियों की सूची इस प्रकार है:
| जिला | अधिकारी का नाम और पद |
| मुर्शिदाबाद | शफी उर रहमान (शमशेरगंज), नीतीश दास (फरक्का), शेख मुर्शिद आलम (सूती) |
| दक्षिण 24 परगना | सत्यजीत दास और जॉयदीप कुंडू (कैनिंग पूर्व) |
| पश्चिम मेदिनीपुर | देबाशीष विश्वास (डेबरा के बीडीओ एवं एआरओ) |
| जलपाईगुड़ी | डालिया रॉयचौधरी (मैनागुड़ी) |
मुख्य सचिव की दिल्ली में पेशी और आयोग की नाराजगी
इससे पहले भी आयोग ने चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया था, जिस पर राज्य सरकार द्वारा 'धीमी गति' अपनाने से आयोग बेहद नाराज है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को दिल्ली तलब किया गया था। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि फर्जी मतदाताओं को जोड़ने या पात्र मतदाताओं को हटाने जैसे किसी भी कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार को इन आदेशों के अनुपालन के लिए 17 फरवरी तक की समय सीमा दी गई है।
28 फरवरी को जारी होगी फाइनल वोटर लिस्ट
SIR प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 28 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का प्रकाशन हर हाल में सुनिश्चित करना है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान करीब 5.8 मिलियन (58 लाख) नाम (मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट) हटाए गए हैं। आयोग की सख्ती का उद्देश्य एक पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है।