सम्राट चौधरी की पहल ने जीता लोगों का दिल, सहयोग शिविर में पेश हुई मिसाल बन गया समाधान का सबसे सशक्त सेतु

सीएम सम्राट के सहयोग शिविर से बिहार के लोगों के उम्मीद जगी है जिससे लोगों को समयबद्ध समाधान का भरोसा मिल रहा है. मंगलवार को सहयोग शिविर में ऐसे कई मामले सामने आए

Samrat Choudhary- फोटो : news4nation

 Bihar News :  वर्षों से जिन समस्याओं को लेकर बिहार के नागरिक परेशान रहा करते थे अब उनकी दिक्कतों का समाधान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अनोखी पहल ‘सहयोग शिविर’ से हो रही है।  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित राज्यस्तरीय ‘सहयोग शिविर’ में राज्य के विभिन्न जिलों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में कुल 101 आवेदक उपस्थित हुए, जिनके मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान कई ऐसे मामले आए जिसने सहयोग शिविर की महत्ता को उजागर किया कि कैसे यह समाधान का सेतु बन गया है। 


पश्चिमी चंपारण की रहने वाली सुमेधा कुमारी को सहयोग शिविर के माध्यम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने का मौका मिला। सुमेधा बताती हैं,“मुख्यमंत्री जी ने हमारी समस्या सुनी और भरोसा दिया कि एक सप्ताह के अंदर इसका समाधान कर दिया जाएगा। हमारी बात सुनी गई और समस्या के समाधान का भरोसा मिला,यह हमारे लिए  बहुत खुशी की बात है। अब हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमारी परेशानी दूर हो जाएगी। मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।” 


अररिया जिले के पलासी प्रखंड की उत्तरी डेढ़टी पंचायत के निवासी मदन कुमार शर्मा बताते हैं, “हमारी समस्या यह थी कि वर्ष 2014 में पंचायत भवन का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो पाया था। इस समस्या को लेकर हम पंचायत से लेकर प्रमंडल स्तर तक कई जगह गए,लेकिन कहीं से भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।” वह आगे बताते हैं,“आज मुख्यमंत्री जी से मिलने के बाद हमें विश्वास दिलाया है कि दो महीने के अंदर पंचायत भवन बनकर तैयार हो जाएगा। इससे हमें बहुत खुशी हुई है। हम मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं। साथ ही,हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं कि पंचायत भवन का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि पंचायत के लोगों को इसका लाभ मिल सके।”


दरअसल, विभागों से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों ने आवेदकों को उनकी समस्याओं के समय पर समाधान का आश्वासन दिया। जिन आवेदकों की समस्याओं का समाधान हो चुका था,उन्होंने राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम की सराहना की। उनका कहना था कि कई दिनों से लंबित समस्याओं का इस कार्यक्रम के माध्यम से जल्द समाधान हुआ है,जिससे आम लोगों को काफी सहूलियत मिल रही है। वहीं, कुछ आवेदक मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रख रहे थे। संबंधित जिलाधिकारियों और विभागों की ओर से समाधान का आश्वासन मिलने के बाद वे संतुष्ट नजर आए।


सरकारी भवनों और बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत का निर्देश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों, अस्पतालों, विद्यालय भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों और छूटे हुए टोलों की सड़कों की मरम्मत, रखरखाव और साफ-सफाई का काम 31 मार्च 2027 से पहले पूरा कराने का निर्देश दिया। उन्होंने विद्यालयों में रंग-रोगन, चहारदीवारी, मरम्मत, शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने को कहा। साथ ही, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण और भवनविहीन विद्यालयों के लिए भवन बनाने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया।


सहयोग शिविर लगाने का उद्देश्य

सहयोग शिविरों का मुख्य उद्देश्य आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, पेंशन, जमीन विवाद और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराना है। पहले इन सेवाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। सहयोग शिविरों के माध्यम से इन सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि लोगों को अपने काम के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों में न जाना पड़े। अक्सर लोग शिकायत दर्ज तो करा देते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है। सहयोग शिविरों में शिकायतें दर्ज करने के साथ-साथ उनकी निगरानी और तय समय सीमा के भीतर निपटारे की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रशासन खुद लोगों तक पहुंचे और उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी सोच के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों को पंचायत स्तर पर भेजा जा रहा है।