सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार की पैरवी के लिए दो नए AAG नियुक्त, जानिए कौन हैं ऐश्वर्य सिन्हा और केशव रंजन
दोनों अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार से संबंधित विभिन्न मामलों में राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके साथ ही वे सरकार को कानूनी मामलों में आवश्यक सलाह देंगे और महाधिवक्ता के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे।
Bihar Government AAG in Supreme Court : बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य से जुड़े कानूनी मामलों की पैरवी को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्य सिन्हा और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) केशव रंजन को अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) नियुक्त किया है। ऐश्वर्य सिन्हा की नियुक्ति बिहार लॉ ऑफिसर्स (एंगेजमेंट) रूल्स, 2023 के प्रावधानों के तहत की गई है।
दोनों अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार से संबंधित विभिन्न मामलों में राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके साथ ही वे सरकार को कानूनी मामलों में आवश्यक सलाह देंगे और महाधिवक्ता के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेंगे। बताया गया है कि दोनों की नियुक्ति की सिफारिश नियमों के तहत गठित चयन समिति ने की थी।
सुप्रीम कोर्ट में दो दशक से अधिक का अनुभव
केशव रंजन मूल रूप से समस्तीपुर जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बिहार में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा दिल्ली में हासिल की। वर्ष 2005 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की। पिछले दो दशकों से अधिक समय से वह शीर्ष अदालत में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
रंजन सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शीर्ष अदालत में लंबे अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को बिहार सरकार के महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की पैरवी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राज्य सरकार के मामलों में निभानी होगी सक्रिय भूमिका
AAG के तौर पर ऐश्वर्य सिन्हा और केशव रंजन को बिहार सरकार की ओर से सौंपे गए मामलों में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। उन्हें अपने जिम्मे आए मामलों की प्रगति और सुनवाई से संबंधित रिपोर्ट समय-समय पर राज्य सरकार को उपलब्ध करानी होगी।
इसके अलावा यदि किसी मामले में अदालत की ओर से बिहार सरकार के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है, तो इसकी जानकारी महाधिवक्ता और संबंधित विभाग को तत्काल देनी होगी। दोनों अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी केवल अदालत में पैरवी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि सरकार को कानूनी रणनीति और मामलों की प्रगति से संबंधित आवश्यक सलाह देना भी इसका हिस्सा होगा।