मतदाता सूची के SIR के बीच BLO ऐप में ‘Mark VIP’ फीचर से बवाल, चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, BLO घर-घर सत्यापन के दौरान किसी मतदाता को VIP के तौर पर चिन्हित कर सकता है। इसके बाद इस मार्किंग की जांच AERO, ERO और फिर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के स्तर पर की जाती है।
Election Commission Controversy : देश के 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के बीच चुनाव आयोग के BLO ऐप में जोड़े गए ‘Mark VIP’ फीचर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस फीचर के जरिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) कुछ विशेष मतदाता को ‘VIP’ के तौर पर चिन्हित कर सकते हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद सवाल उठे कि क्या SIR के दौरान कुछ खास लोगों को सामान्य मतदाताओं से अलग सुविधा दी जा रही है। जब संविधान में सभी मतदाता समान माने गए हैं तो इस प्रकार से कुछ विशेष मतदताओं को वीआईपी बताकर चिन्हित करने पर बड़ा सवाल उठ रहा है।
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, BLO ऐप को 30 जुलाई को अपडेट किया गया और Apple App Store पर 31 जुलाई को इस अपडेट का विवरण ‘mark VIP elector related changes’ के रूप में दर्ज हुआ। दिल्ली और हरियाणा के BLO ने इस फीचर के ऐप में मौजूद होने की पुष्टि की है। वहीं पश्चिम बंगाल के BLO के मुताबिक, नवंबर 2025 में वहां हुए SIR के दौरान यह फीचर मौजूद नहीं था और बाद में इसे जोड़ा गया।
VIP कैसे चिन्हित होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, BLO घर-घर सत्यापन के दौरान किसी मतदाता को VIP के तौर पर चिन्हित कर सकता है। इसके बाद इस मार्किंग की जांच AERO, ERO और फिर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के स्तर पर की जाती है। चुनाव आयोग के 2023 के Electoral Rolls Manual में पहले से ही ‘marked electors’ की व्यवस्था का उल्लेख है। इसमें सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, घोषित पदों के धारक तथा कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका और सार्वजनिक सेवा से जुड़े लोगों जैसी श्रेणियां शामिल हैं।
VIP फीचर पर क्यों उठे सवाल?
विवाद की वजह यह है कि दिल्ली में SIR के दौरान कई प्रमुख लोगों को भी मतदाता सूची से जुड़े नोटिस मिले। इसके बाद The Reporters’ Collective ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि अधिकारियों को मंत्रियों और उनके परिवारों, सेलिब्रिटी, जज, वकील, नौकरशाह, IAS-IPS अधिकारी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कुछ वर्गों को VIP के रूप में चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। रिपोर्ट ने इसे आम मतदाताओं की तुलना में अलग प्रक्रिया से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष है कि VIP या ‘marked electors’ की अवधारणा नई नहीं है। आयोग के नियमों और मैनुअल में ऐसी श्रेणियों का प्रावधान पहले से है। आयोग के मुताबिक इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं की पहचान कर यह सुनिश्चित करना है कि उनका नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल हो और दावे-आपत्तियों के दौरान जरूरी दस्तावेज जुटाए जा सकें। VIP चिन्हित होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता जांच या दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया से बाहर हो जाता है।
SSR को लेकर भी चुनाव आयोग की सफाई
SIR के कारण Summary Special Revision (SSR) नहीं होने से 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जुड़ने पर उठ रहे सवालों पर आयोग ने कहा है कि नए मतदाताओं का पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान भी पात्र नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया जारी रही है। इस बीच ‘Mark VIP’ फीचर को लेकर बहस ने SIR की पारदर्शिता, सभी मतदाताओं के साथ समान प्रक्रिया और चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।