'आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए'... जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' चाहती है न्यायपूर्ण रिजर्वेशन, संतोष सुमन की बड़ी मांग
संतोष सुमन ने कहा, हमने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तब भी समर्थन किया था और आज भी करते हैं। आखिर 79 वर्ष की आजादी के बाद यह सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला
Review of Reservation : देश में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव और समीक्षा की मांगों को लेकर उठ रही आवाजों के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा ने बड़ा बयान दिया है। मांझी के बेटे और बिहार मंत्रिमंडल सदस्य संतोष सुमन ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव इसके न्यायपूर्ण रिजर्वेशन की वकालत की। उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा का अर्थ आरक्षण समाप्त करना नहीं, बल्कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाना है।
उन्होंने कहा, हमने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तब भी समर्थन किया था और आज भी करते हैं। आखिर 79 वर्ष की आजादी के बाद यह सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े कौन-से लोग आज भी इससे वंचित हैं?
दलित समाज के भीतर हो वर्गीकरण
संतोष सुमन ने कहा कि हमारे देश में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को पहचानने के लिए वर्गीकरण की व्यवस्था पहले भी हुई है। सामान्य वर्ग के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए EWS की व्यवस्था बनी, पिछड़े वर्गों में भी पिछड़ा और अतिपिछड़ा की अलग पहचान की गई। जब एक ही बड़े सामाजिक वर्ग के भीतर वास्तविक वंचितों तक लाभ पहुँचाने के लिए अलग श्रेणियां बनाई जा सकती हैं, तो फिर दलित समाज के भीतर भी यह देखना क्यों गलत है कि आरक्षण का लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुँच रहा है या नहीं?
उन्होंने कहा कि दलित समाज कोई एकरूप वर्ग नहीं है। उसके भीतर भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में अंतर है। यदि कुछ जातियां आरक्षण का लाभ लगातार अधिक प्राप्त कर रही हैं और कुछ आज भी पीछे हैं, तो उन तक अवसर पहुँचाने के लिए उप-वर्गीकरण क्यों नहीं होना चाहिए? इसका अर्थ आरक्षण समाप्त करना नहीं है। बल्कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के दिए संवैधानिक अधिकार को उसके वास्तविक हकदारों तक पहुँचाना है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण बचाना है तो उसकी पहुंच भी न्यायपूर्ण बनानी होगी। आरक्षण रहे, लेकिन उसका लाभ सबसे वंचित तक पहुँचे—यही सामाजिक न्याय है।
नरोत्तम की रिपोर्ट