बिहार को मोदी कैबिनेट बड़ा तोहफा! कोलकाता-दिल्ली समेत 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर होंगे चार-लेन

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार देश के करीब 11,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। ये कॉरिडोर भारतीय रेलवे के कुल यातायात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा

Modi cabinet decides - फोटो : news4nation

Modi cabinet : केंद्र सरकार के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के फैसले से बिहार को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के सात प्रमुख हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को चार-लेन यानी चार ट्रैक क्षमता वाला बनाने की दिशा में बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें कोलकाता-दिल्ली रेलवे कॉरिडोर भी शामिल है, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार से होकर गुजरता है। इससे बिहार से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने, यात्री और माल परिवहन को सुगम बनाने तथा भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार देश के करीब 11,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। ये कॉरिडोर भारतीय रेलवे के कुल यातायात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं। सरकार का लक्ष्य इन महत्वपूर्ण रूटों पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है।


बिहार के लिए क्यों अहम है कोलकाता-दिल्ली रूट?

कोलकाता-दिल्ली रेलवे कॉरिडोर देश के सबसे महत्वपूर्ण यात्री और माल परिवहन मार्गों में से एक है। इस कॉरिडोर का एक हिस्सा बिहार से होकर गुजरता है। ऐसे में इसकी क्षमता बढ़ने का सीधा लाभ बिहार से जुड़ी रेल सेवाओं को मिल सकता है। बिहार से होकर गुजरने वाले इस रूट पर ट्रेनों का दबाव काफी अधिक है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों के परिचालन में अधिक लचीलापन आएगा और यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।


इसका फायदा बिहार के उन कई जिलों को मिलने की संभावना है, जो कोलकाता-दिल्ली रेल नेटवर्क से सीधे या इसके प्रमुख जंक्शनों के माध्यम से जुड़े हैं। खासकर पूर्वी और मध्य बिहार से दिल्ली तथा कोलकाता की ओर आने-जाने वाले यात्रियों और कारोबारियों के लिए रेलवे क्षमता बढ़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


इन प्रमुख रूटों को किया जाएगा मजबूत

कैबिनेट की मंजूरी के तहत कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी जैसे प्रमुख रेल रूटों की क्षमता बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन को भी मंजूरी दी गई है। खड़गपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन परियोजना की लंबाई करीब 367 किलोमीटर होगी और इस पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे मुंबई-हावड़ा रेल नेटवर्क पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी और यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।


7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर सरकार का फोकस

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देश के सात प्रमुख हाई-डेंसिटी कॉरिडोर लगभग 11,000 किलोमीटर लंबे हैं। इनमें से करीब 2,000 किलोमीटर हिस्सा पहले ही चार-लेन क्षमता वाला बनाया जा चुका है, जबकि करीब 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या मंजूरी मिल चुकी है। शेष हिस्से के लिए भी मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन कॉरिडोर पर यात्री और माल यातायात में और तेजी से बढ़ोतरी होगी। ऐसे में पहले से अतिरिक्त रेल क्षमता तैयार करना जरूरी है।


तीन मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को भी मंजूरी

कैबिनेट ने इसके साथ ही पांच राज्यों के 14 जिलों में फैले तीन मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इनकी अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


चार राज्यों में 5 और मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट

कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में पांच अन्य मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से रेलवे का मौजूदा नेटवर्क करीब 540 किलोमीटर बढ़ेगा। इनकी अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें भी 2029-30 तक पूरा करने की योजना है।


केंद्र सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य देश के प्रमुख रेल मार्गों पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना और यात्री तथा माल परिवहन की क्षमता बढ़ाना है। बिहार के लिए खास तौर पर कोलकाता-दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की क्षमता बढ़ना राज्य की रेल कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।