कोसी हो या गंडक, दोनों से जुड़ी है भोटेकोसी! नेपाल की इस नदी का है रोचक रहस्य, बिहार में लाती है बर्बादी

नेपाल में बहने वाली भोटेकोसी से बिहार की दो प्रमुख नदियाँ कोसी और गंडक जुड़ी हैं, यही कारण है कि नेपाल में आए जल प्रलय का कारण बिहार की चिंताएं बढ़ गई हैं. भोटेकोसी कैसे बिहार की नदियों का स्वरूप बदल देती हैं जानिए.

Bhote Koshi link with Koshi and Gandak - फोटो : news4nation

Nepal floods: नेपाल में भारी बारिश और जल प्रलय की घटनाओं के बीच हिमालय से निकलने वाली नदियों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। बिहार में कोसी और गंडक जैसी नदियों का इतिहास और उनका स्वभाव समझने के लिए नेपाल की भोटेकोसी को जानना बेहद दिलचस्प है। खास बात यह है कि नेपाल में भोटेकोसी नाम की दो अलग-अलग नदियां हैं और दोनों का संबंध बिहार की महत्वपूर्ण नदियों से है।


भोटेकोसी का अर्थ क्या है?

नेपाली में इसे भोटेकोसी और हिंदी में आम तौर पर भोट कोसी कहा जाता है। 'भोट' का अर्थ तिब्बत और 'कोसी' का अर्थ नदी माना जाता है। यानी इसका सामान्य अर्थ हुआ—तिब्बत की नदी। हालांकि तिब्बत में इसे भोटेकोसी नाम से नहीं, बल्कि पोईकू (Poiqu) कहा जाता है। इसका उद्गम झांगजेंगबो ग्लेशियर क्षेत्र से माना जाता है। संकरी और गहरी हिमालयी घाटियों से उतरने के कारण इस नदी में तेज बहाव और जबरदस्त वेग रहता है।


कोसी से कैसे जुड़ती है भोटेकोसी?

नेपाल की एक भोटेकोसी आगे चलकर सुनकोसी में मिलती है। इसके बाद सुनकोसी, अरुण और तमोर (तिमूर) समेत कई हिमालयी धाराओं से जुड़ती है। दूधकोसी, तामाकोसी और लिखुकोसी जैसी नदियां भी इस विशाल नदी-प्रणाली का हिस्सा हैं। नेपाल के बराह क्षेत्र के आसपास इन धाराओं के मिलने से सप्तकोसी का निर्माण होता है। इसके बाद नदी पहाड़ों को पार करते हुए चतरा क्षेत्र से मैदान की ओर आती है और आगे भारत में प्रवेश कर बिहार में सुपौल जिले से शुरू होकर कोसी के रूप में बहती है जिसका संगम गंगा में होता है।


गंडक से भी मिलती है भोटेकोसी

नेपाल में दूसरी भोटेकोसी भी है, जो कोसी की नहीं बल्कि गंडक नदी-प्रणाली से जुड़ती है। यही नाम समान होने के कारण अक्सर भ्रम पैदा होता है। इस भोटेकोसी का जल आगे गंडक नदी की प्रणाली में पहुंचता है। यानी एक ही नाम की दो नदियां—एक कोसी से जुड़ी, दूसरी गंडक से। गंडक की मुख्य धारा का उद्गम नेपाल के हिमालय में धौलागिरी और अन्नपूर्णा क्षेत्र के आसपास माना जाता है। ऊपरी हिस्से में इसे काली गंडकी कहा जाता है। आगे नेपाल में ही बड़ी गंडकी, त्रिशूली आदि प्रमुख नदियाँ भी गंडक की जलधारा से मिलती हैं।


नेपाल से निकलकर गंडक नदी बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में वाल्मीकिनगर के पास भारत में प्रवेश करती है। यहीं वाल्मीकिनगर बैराज भी स्थित है। गंडक बिहार के कई जिलों से होकर बहती है, जिनमें प्रमुख रूप से पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर क्षेत्र शामिल हैं। आखिर में गंडक नदी सोनपुर (सारण) के पास गंगा नदी में मिल जाती है।



बिहार में कई साल लाती है बर्बादी 

ऐसे में कोसी हो या गंडक दोनों ही नदियों का विशाल जल बहाव क्षेत्र बिहार में है। वहीं जैसे ही नेपाल में भोटेकोसी में पानी का बहाव तेज होता है इसका सीधा असर बिहार पर पड़ता है। बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ में कोसी और गंडक दोनों की अहम भूमिका होती है। कई जिलों में बड़े स्तर पर बाढ़ से तबाही और बर्बादी भी होती है। इस बार भी 26 अगस्त को नेपाल में आये जलप्रलय के कारण बिहार पर गंभीर खतरा मंडराने लगा। हालांकि राहत की बात है कि गंडक नदी में जलस्तर सामान्य है। इतना ही नहीं  वाल्मीकिनगर में भी आपदा वाली स्थिति नहीं है। 

177 की मौत

नेपाल में आई भयानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 177 हो गई। नेपाल में अधिकारी सैकड़ों लापता लोगों को ढूंढने में लगे हैं, जिनमें 300 भारतीय टूरिस्ट भी शामिल हैं। वहीं जान-माल के नुकसान का वास्तविक आकलन अगले कुछ दिनों में पता चलेगा जब दूर दराज के इलाकों में पूरी सुचना आएगी और मलबा हटाने का काम होगा।

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