दीपक प्रकाश देंगे मंत्री पद से इस्तीफा ! सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सीएम सम्राट के मंत्री दिलीप का बड़ा ऐलान

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने मंत्री पद पर बनाए रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

Deepak Prakash Resign- फोटो : news4nation

Deepak Prakash Resign : बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर बनाए रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब बिहार सरकार की ओर से पहली बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। राज्य के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार संविधान के दायरे में काम करती है और सुप्रीम कोर्ट का जो भी आदेश आएगा, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा। दिलीप जायसवाल ने कहा, "यह मामला संवैधानिक पीठ के समक्ष है। निश्चित तौर पर जो भी आदेश आएगा, उसका पालन होगा। संविधान जो कहता है, वही होगा। यदि सुप्रीम कोर्ट कोई निर्देश देता है तो बिहार सरकार तत्काल उसके अनुरूप कार्रवाई करेगी।" उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सरकार अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेगी और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट का ही होगा।


सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

दरअसल, बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य बने मंत्री पद पर बनाए रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार से पूछा है कि जब दीपक प्रकाश अब तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं बने हैं, तो उन्हें मंत्री पद पर कैसे बनाए रखा गया है।


सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे संविधान से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित है और अदालत जो भी आदेश देगी, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।


दो बार मंत्री बने, लेकिन नहीं बने सदन के सदस्य

दीपक प्रकाश को वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था। उस समय वे न तो विधायक थे और न ही उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा था। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायक होने के बावजूद पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनवाया। बाद में मुख्यमंत्री बदलने के बाद सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में भी दीपक प्रकाश को फिर से पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि अब तक वे न विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य बन सके हैं।


क्या कहता है संविधान?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद सदस्य नहीं होते हुए मंत्री बनाया जाता है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। यदि वह निर्धारित अवधि में निर्वाचित या मनोनीत नहीं होता है, तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।


ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और उसके फैसले पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि अदालत का फैसला न केवल दीपक प्रकाश के मंत्री पद, बल्कि इस तरह की संवैधानिक नियुक्तियों को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

अभिजीत की रिपोर्ट