परिसीमन बिल पर बदले द्रमुक के सुर से महज विरोध से लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से महज दो कदम दूर एनडीए,सरकार को दिखी नई उम्मीद, विपक्ष भी हमलावर

Political News: केंद्र सरकार के बहुचर्चित परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी गलियारों में नई हलचल तेज हो गई है।...

लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से महज दो कदम दूर एनडीए- फोटो : social Media

Political News: केंद्र सरकार के बहुचर्चित परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी गलियारों में नई हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। चुनाव से पहले जिस विधेयक का खुलकर विरोध किया जा रहा था, अब उसी पर द्रमुक ने पहले मसौदा, फिर फैसला की रणनीति अपना ली है। माना जा रहा है कि यदि विधेयक में राज्यों की विधानसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान शामिल होता है, तो पार्टी इसके समर्थन पर विचार कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार द्वारा पहले लाए गए विधेयक में विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की चर्चा जरूर थी, लेकिन इसे विधेयक का हिस्सा नहीं बनाया गया था। इसी वजह से द्रमुक ने उस समय इसका कड़ा विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। अब द्रमुक के वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का पुराना रुख अब नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने आए, उसके बाद ही समर्थन या विरोध पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

लोकसभा में द्रमुक के 22 सांसद हैं और संविधान संशोधन से जुड़े इस विधेयक को पारित कराने में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सरकार को इस बिल को पारित कराने के लिए लोकसभा में 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी, जबकि एनडीए के पास फिलहाल करीब 326 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। ऐसे में द्रमुक का बदला हुआ रुख सत्ता पक्ष के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है।

दूसरी ओर, सरकार विपक्ष के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश में जुटी है। संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की। करीब 50 मिनट चली इस बैठक में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं। माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र बिंदु संसद की कार्यवाही और महत्वपूर्ण विधेयकों पर सहमति बनाने का प्रयास रहा।

हालांकि, किरेन रिजिजू ने यह स्पष्ट किया है कि 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके बावजूद सरकार मौजूदा मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने की नई रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार विपक्षी दलों के साथ कितनी सहमति बना पाती है और द्रमुक सहित अन्य क्षेत्रीय दल अंतिम मसौदे पर क्या रुख अपनाते हैं। संविधान संशोधन से जुड़े इस विधेयक के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।