Bihar School News: स्कूल में भ्रष्टाचार पर शिक्षा विभाग का शिकंजा, हेडमास्टर खुर्शीद हुसैन अंसारी निलंबित
अवैध तरीके से परीक्षा शुल्क वसूलने, चेतना सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार करने समेत अन्य आरोपों में प्रधानाध्यापक खुर्शीद हुसैन अंसारी को निलंबित कर दिया गया है।
Bihar School News: सीवान के महाराजगंज स्थित प्रैक्टिकल उच्च विद्यालय, सिकटिया में भ्रष्टाचार और कथित मनमानी के आरोपों पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। अवैध तरीके से परीक्षा शुल्क वसूलने, चेतना सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार करने समेत अन्य आरोपों में प्रधानाध्यापक खुर्शीद हुसैन अंसारी को निलंबित कर दिया गया है। विभाग की प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। निलंबन के साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग के मुताबिक, प्रधानाध्यापक पर विद्यालय में निर्धारित नियमों के विपरीत परीक्षा शुल्क वसूलने के आरोप लगे थे। इसके अलावा चेतना सत्र में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ कथित तौर पर अनुचित एवं अपमानजनक व्यवहार किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। विभागीय स्तर पर की गई जांच में शिकायतों और आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर माना गया।
मामले की आगे की जांच के लिए पीएम पोषण योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को संचालन पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि महाराजगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभागीय जांच के दौरान संबंधित अधिकारी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेंगे।
निलंबन अवधि के दौरान खुर्शीद हुसैन अंसारी का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, जीरादेई निर्धारित किया गया है। विभाग की ओर से उनके खिलाफ अलग से आरोपपत्र गठित किया जाएगा। इसके बाद विभागीय कार्यवाही में आरोपों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच की जाएगी।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी विद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अंतिम तौर पर आरोपों की पुष्टि विभागीय कार्यवाही पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल निलंबन आदेश प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जारी किया गया है।
मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि विद्यालयों में छात्रों से शुल्क वसूली और उनके साथ व्यवहार को लेकर निर्धारित नियमों का पालन किस हद तक हो रहा है। शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई के जरिए यह संकेत दिया है कि शिकायतों की अनदेखी के बजाय जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।