लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, पूरे सत्र में सिर्फ 16 प्रतिशत हुआ काम, अंतिम दिन आए पीएम मोदी और शाह

20 जुलाई से शुरू हुआ मॉनसून सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त तक चलना था, लेकिन पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी।

Lok Sabha adjourned sine die- फोटो : news4nation

Lok Sabha : संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को विपक्ष के लगातार हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे। 20 जुलाई से शुरू हुआ मॉनसून सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त तक चलना था, लेकिन पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी।


सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी दलों ने प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की। इसके अलावा अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला भी सदन में जोर-शोर से उठाया गया।


इससे पहले विपक्षी दलों ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया था। कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक के दलों ने परीक्षा विवाद पर तत्काल चर्चा की मांग की और सरकार से छात्रों तथा उनके परिवारों की चिंताओं का जवाब देने को कहा। विपक्ष ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की और कहा कि चर्चा के जरिए सरकार अपना पक्ष रखने के साथ आरोपों का जवाब दे सकती है।


लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। कई दिनों तक प्रश्नकाल और शून्यकाल भी प्रभावित रहे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में निर्धारित कामकाज का करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में लगभग 31 प्रतिशत ही हो सका। इस दौरान कई घंटे हंगामे की वजह से बर्बाद हुए।


हालांकि, विपक्ष के विरोध के बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल, टैक्सेशन संशोधन बिल, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा विधेयक, MSME संशोधन बिल और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल प्रमुख रहे। इनमें से कई विधेयक विस्तृत चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित किए गए।


वहीं, FCRA संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक इस सत्र में लंबित रह गए। इस तरह संसद का मॉनसून सत्र कानून बनाने के साथ-साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव के लिए भी याद किया जाएगा।