छात्रों पर जुल्म और पैलेट गन के वार पर संसद में तकरार, गृहमंत्री की खामोशी से सियासत गरम, सभापति ने कहा-अमित शाह तक संदेश पहुंचाएं रिजिजू, निर्देश से बढ़ा सियासी तापमान

Political News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई बर्बर पुलिसिया कार्रवाई और बिहार में एके-47 के खौफनाक गोलीबारी ने संसद के मॉनसून सत्र को एक अखाड़े में तब्दील कर दिया है। ...

छात्रों पर जुल्म और पैलेट गन के वार पर संसद में तकरार- फोटो : social Media

Political News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर  छात्रों के खिलाफ हुई बर्बर पुलिसिया कार्रवाई और बिहार में एके-47 के खौफनाक गोलीबारी ने संसद के मॉनसून सत्र को एक अखाड़े में तब्दील कर दिया है। संसद के भीतर और बाहर सिर्फ एक ही गूंज है गृह मंत्री अमित शाह इस जुल्म पर अपना मुंह खोलें और जवाबदेह बनें। मगर सत्तापक्ष की खामोशी और विपक्ष की आक्रामकता ने सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है।

गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही जब हंगामे के साये में दोबारा शुरू हुई, तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखे तेवरों के साथ हुकूमत को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब हम अवाम और छात्रों के हक में जायज सवाल पूछ रहे हैं, तो सरकार मैदान छोड़कर भाग रहे हैं। खड़गे ने दिवंगत नेता अरुण जेटली के पुराने बयानों का हवाला देकर यह जता दिया कि विरोध और हंगामा भी लोकतंत्र का एक लाजिमी हिस्सा है, बशर्ते नीयत साफ हो।

विपक्ष की इस जिद और हंगामे के बीच राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन का रुख बेहद अहम रहा। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की तरफ मुखातिब होते हुए दो-टोकर कहा कि वे विपक्ष की जज्बातों को गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाएं। हालांकि, सभापति ने यह भी जोड़ा कि बयान देना या न देना अंततः शाह का ही निर्णय होगा, लेकिन सियासी गलियारों में इसे आसन की तरफ से हुकूमत को दिया गया एक बड़ा और कड़ा पैगाम माना जा रहा है।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी इस वाक्ये पर तंज कसते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार अब इस तानाशाही रवैये से तौबा कर सभापति के निर्देशों पर अमल करेगी। कुल मिलाकर, छात्र आंदोलन की तपिश अब संसद की दीवारों को चीरती हुई सड़कों से लेकर संसद के गलियारों तक गूंज रही है। सवाल यह है कि क्या गृहमंत्री  इस  मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे या लोकतंत्र की इस चौपाल पर अड़ियल रुख का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा? वक्त और सियासत का अगला कदम ही इस बात का फैसला करेगा।