Supreme Court Decision: मकान मालिक बनाम किरायेदार के मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,साफ कर दिया, कौन करेगा प्रॉपर्टी का इस्तेमाल..

Supreme Court Decision: किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद होना आम है। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि मकान मालिक को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि संपत्ति का कौन सा हिस्सा खाली कराया जाए।

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किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद - फोटो : social Media

Supreme Court Decision:  सुप्रीम कोर्ट ने किराए पर दी गई संपत्तियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जो सभी मकान मालिकों के लिए जानना आवश्यक है। इस निर्णय में अदालत ने स्पष्ट किया कि मकान मालिक को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि उसकी आवश्यकता को पूरा करने के लिए किराए पर दी गई संपत्ति का कौन सा हिस्सा खाली कराया जाए।

कई बार किराएदार अपने निवास स्थान को खाली करने से इनकार कर देते हैं, जिससे कानूनी विवाद उत्पन्न होता है। इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किराएदार इस आधार पर परिसर खाली करने से इनकार नहीं कर सकता कि मकान मालिक के पास अन्य संपत्तियां भी उपलब्ध हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मकान मालिक की वास्तविक जरूरत के आधार पर किराएदार को बेदखल करने का कानून पहले से ही स्थापित है।

इस मामले में एक मकान मालिक ने याचिका दायर की थी जिसमें उसने बताया कि उसे अपने दो बेरोजगार बेटों के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगवानी है और इसके लिए उसे किराएदार से वह जगह खाली करवानी है। निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान किराएदार द्वारा दिए गए तर्क को खारिज कर दिया कि मकान मालिक के पास अन्य संपत्तियां हैं और वह उन संपत्तियों को खाली करके अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है। अदालत ने कहा कि एक बार जब मकान मालिक की वास्तविक जरूरतें स्थापित हो जाती हैं, तो किराएदार उसे अपनी सुविधा के आधार पर किसी अन्य संपत्ति को खाली कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

किराएदार ने न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया कि मकान मालिक के पास अन्य संपत्तियाँ भी हैं और वह अपने मकान के बजाय किसी अन्य संपत्ति को खाली करवा सकता है। इस तर्क को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि जब मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता पूरी हो जाती है, तब किराएदार अपनी सुविधा के अनुसार मकान मालिक को किसी अन्य संपत्ति को खाली करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

इस मामले में, जिस स्थान की बात हो रही थी, वह एक मेडिकल क्लिनिक और पैथोलॉजिकल सेंटर के निकट स्थित था, जो अल्ट्रासाउंड मशीन लगाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान था। फैसले से स्पष्ट हो गया है कि मकान मालिकों को अपनी संपत्ति का उपयोग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार करने का अधिकार है। किराएदार यह तय नहीं कर सकते कि मकान मालिक को कौन सी संपत्ति को खाली करवाना चाहिए। 


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