Ajit Pawar: सियासी क्षितिज का चमकता सूरज हो गया जमींदोज, किंगमेकर तो बने पर किंग बनने की हसरत रह गई अधूरी

Ajit Pawar: महाराष्ट्र की सियासत का वो कुशल घुड़सवार', जिसकी चाल के आगे बड़े-बड़े सूरमा मात खा जाते थे, आज कुदरत के एक बेरहम फैसले का शिकार हो गया।...

सियासी क्षितिज का चमकता सूरज हो गया जमींदोज- फोटो : social Media

Ajit Pawar:महाराष्ट्र की सियासत का वो कुशल घुड़सवार', जिसकी चाल के आगे बड़े-बड़े सूरमा मात खा जाते थे, आज कुदरत के एक बेरहम फैसले का शिकार हो गया। उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती के करीब विमान हादसे में मौत महज एक नेता का जाना नहीं, बल्कि सूबे की राजनीति के एक 'अजेय' अध्याय का तमाम हो जाना है। 66 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाले अजित दादा अपने पीछे सत्ता का वो तिलिस्म छोड़ गए हैं, जिसे भेदना किसी के बस की बात नहीं थी।

अजित पवार के बारे में सियासी गलियारों में एक जुमला मशहूर था कि महाराष्ट्र की सत्ता चाहे किसी भी खेमे में रहे, 'दादा' कभी सत्ता से बाहर नहीं रह सकते। उन्होंने 6 बार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसे तोड़ना मुहाल होगा। लेकिन इस चमकदार करियर के पीछे एक 'खलिश' हमेशा रही मुख्यमंत्री की कुर्सी तक न पहुंच पाने का मलाल।

एक बार भरे मजमे में अपना दर्द बयां करते हुए उन्होंने कहा था, "अगर मैं शरद पवार का बेटा होता, तो क्या मुझे मौका नहीं मिलता?" यह जुमला उनकी उस छटपटाहट का गवाह था, जो विरासत और काबिलियत के बीच की जंग को बयां करती थी। उन्होंने 'सीनियर पवार' से बगावत कर पार्टी की कमान अपने हाथ में ली, चुनाव चिन्ह छीना और यह साबित किया कि बारामती का असली वारिस कौन है। हालिया चुनाव में अपने ही भतीजे युग्रेंद्र पवार को शिकस्त देकर उन्होंने अपनी धाक फिर से जमाई थी।

सहकारिता से सियासत के शिखर तक

22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार को सियासत विरासत में मिली थी, लेकिन उसे परवान उन्होंने अपनी ज़हमत और ज़हानत से चढ़ाया। महज 23 साल की उम्र में कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड से शुरू हुआ उनका सफर, पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्षता से होता हुआ दिल्ली की संसद और फिर महाराष्ट्र विधानसभा तक पहुंचा। 1995 से लेकर 2024 तक बारामती की अवाम ने उन्हें सात बार लगातार  अपना नेता चुना।

प्रशासन: सिंचाई मंत्रालय हो या जल संसाधन, उन्होंने अपनी प्रशासनिक पकड़ से नौकरशाही में भी अपना खौफ और सम्मान कायम रखा।अजित पवार एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति को 'मराठा क्षत्रप' की रिवायत से निकालकर आधुनिक और जोड़-तोड़ की सियासत के नए दौर में दाखिल किया। आज उनके जाने से सूबे के सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। बारामती के आसमान में हुआ यह हादसा महाराष्ट्र के एक युग का अंत है।