Government Decision: आधी रात को सरकार ने मुसलमानों को दिया बड़ा झटका, अब आरक्षण का नहीं मिलेगा फायदा, 2014 में हुआ था लागू
Government Decision: सरकारी आदेश के अनुसार, 2014 में जिन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूहों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (SBC-A) श्रेणी के तहत आरक्षण दिया गया था। अब वह व्यवस्था प्रभावहीन मानी जाएगी।
Government Decision: प्रदेश के मुस्लिमों को सरकार ने करारा झटका दिया है। मुसलमानों को अब आरक्षण का फायदा नहीं मिलेगा। आधी रात को यह फैसला लिया गया है। दरअसल, मामला महाराष्ट्र का है। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मंगलवार रात एक महत्वपूर्ण सरकारी आदेश जारी करते हुए मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को दी गई 5 प्रतिशत SEBC (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) आरक्षण व्यवस्था को समाप्त कर दिया। यह फैसला वर्ष 2014 की नीति से जुड़े अदालती आदेश और उसकी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
अब नहीं मिलेगा आरक्षण का फायदा
सरकारी आदेश के अनुसार, 2014 में जिन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूहों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (SBC-A) श्रेणी के तहत आरक्षण दिया गया था। अब वह व्यवस्था प्रभावहीन मानी जाएगी। इसके तहत सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश से जुड़े सभी प्रावधान वापस ले लिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद समुदाय के भीतर प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
2014 में लागू हुई थी आरक्षण नीति
यह आरक्षण व्यवस्था जुलाई 2014 में तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीम खान के प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू की गई थी। इसके तहत मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। पात्र लाभार्थियों को जाति प्रमाण पत्र और वैधता प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि, इस फैसले को उसी वर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार की नौकरियों में इस आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा और नीति की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।
अध्यादेश स्थायी कानून नहीं बन सका
राज्य सरकार का कहना है कि जिस अध्यादेश के माध्यम से यह आरक्षण लागू किया गया था, वह कभी स्थायी कानून में परिवर्तित नहीं हुआ। अध्यादेश की अवधि समाप्त होने के साथ ही उससे जुड़े सभी सरकारी परिपत्र और आदेश स्वतः निरस्त हो गए। इसी कानूनी स्थिति को आधार बनाते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने 2014 और 2015 में जारी सभी संबंधित आदेशों को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, नया आदेश अदालत द्वारा समर्थित स्थिति के अनुरूप सरकारी रिकॉर्ड को अद्यतन करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। हालांकि, राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि यह आरक्षण मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों को शिक्षा और रोजगार में अवसर देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।