Ayodhya Ram Mandir: रामनगरी में बदलेंगे दर्शन के नियम, नवरात्र से सुबह 6 बजे खुलेंगे रामलला के पट,VIP पास बंद

Ayodhya Ram Mandir:चैत्र नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही रामनगरी में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बनने जा रहा है।...

रामनगरी में बदलेंगे दर्शन के नियम- फोटो : social Media

Ayodhya Ram Mandir: 19 मार्च को चैत्र नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही रामनगरी में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बनने जा रहा है। इस बार नवरात्र और रामनवमी मेले को देखते हुए रामलला के दर्शन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब नवरात्र की शुरुआत से ही श्रद्धालु सुबह 6 बजे से रामलला के दर्शन कर सकेंगे।

दर्शन के समय में बदलाव होने से मंदिर की शृंगार आरती का समय भी परिवर्तित कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार शृंगार आरती अब भोर में 5:30 बजे से 5:50 बजे के बीच संपन्न होगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती भीड़ और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।इसी के साथ वर्ष प्रतिपदा से ही प्रसिद्ध चैत्र रामनवमी मेले का भी शुभारंभ हो रहा है। इस बार यह आयोजन और भी खास होने जा रहा है, क्योंकि उसी दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन का कार्यक्रम भी तय हो गया है। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं को और अधिक सख्त किया गया है।

मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक उस दिन सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक दो-दो घंटे के स्लॉट में जारी किए जाने वाले सुगम और विशिष्ट दर्शन पास जारी नहीं किए जाएंगे। ट्रस्ट के सदस्य डॉ. मिश्र ने बताया कि जो विशिष्ट या सुगम दर्शन पास पहले से ऑनलाइन बनाए जा चुके हैं, उन्हें भी स्वतः निरस्त माना जाएगा।आरती पास को लेकर भी अभी मंथन जारी है। मंगला आरती, शृंगार आरती और शयन आरती के पास जारी किए जाएं या नहीं, इस पर मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। भीड़ की स्थिति को देखते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

रामनवमी के अवसर पर हर साल लाखों श्रद्धालु रामनगरी पहुंचते हैं। मान्यता है कि दोपहर 12 बजे रामलला के प्राकट्योत्सव के दर्शन के बाद ही श्रद्धालु वापस लौटते हैं। इसी कारण अंतिम दिनों में भीड़ को संभालने के लिए अक्सर देर रात तक मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं।रामनवमी के दिन एक और अद्भुत दृश्य देखने के लिए भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, जब सूर्य की किरणें सीधे रामलला के ललाट पर पड़ती हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

उधर प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले में वैसे तो शुरुआत से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है, लेकिन सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन परंपरागत रूप से सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। इन तीन दिनों के लिए विशेष सुरक्षा और प्रबंधन की तैयारी की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।