Bhagalpur sting case: स्टिंग ऑपरेशन मामले में पत्रकारों को राहत, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, साजिश के तहत फंसाने की कोशिश
Bhagalpur sting case: भागलपुर स्टिंग ऑपरेशन मामले में अदालत ने 5 पत्रकारों को राहत दे दी है। हालांकि, पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
Bhagalpur sting case: भागलपुर के जोगसर थाना क्षेत्र में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर दर्ज मामले में नया मोड़ तब आया जब अदालत ने पांचों पत्रकारों को राहत देते हुए न्यायिक हिरासत में भेजने से इनकार कर दिया। 23 अप्रैल 2026 को हुई इस कार्रवाई के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में अधिवक्ता और पत्रकारों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रेस वार्ता में अधिवक्ता आलय बनर्जी ने कहा कि पत्रकार शहर के एक रेस्टोरेंट में चल रही कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए उल्टे पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी। उन्होंने बताया कि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, भागलपुर ने सभी पक्षों को सुनने और पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद पांचों पत्रकारों को साधारण मुचलके पर रिहा कर दिया।
हाई कोर्ट के अधिवक्ता ने क्या आरोप लगाया
हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद राय ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई साजिश के तहत की गई, जिसमें थाना स्तर पर गलत तरीके से पत्रकारों को फंसाने का प्रयास हुआ। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार गौतम सुमन ‘गर्जना’ ने कहा कि बिना पूरी जांच के पत्रकारों को “फर्जी” बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से पंजीकृत समाचार पत्र से जुड़े हैं और प्रशासन को पहले सत्यापन करना चाहिए था।
सूचना के आधार पर मौके पर पहुंचे थे
अन्य पत्रकारों ने भी दावा किया कि वे सूचना के आधार पर मौके पर पहुंचे थे और अपने पेशेगत दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच हो, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। प्रेस वार्ता में शामिल सभी लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी निर्दोष को परेशान न किया जाए।हम आपको बता दें कि पूर्व में भी भागलपुर पुलिस द्वारा निर्दोष पत्रकारों को फंसाया गया है.
भागलपुर से balmukund kumar की रिपोर्ट