Bihar News: अस्पताल या अव्यवस्था का अड्डा? हॉस्पीटल से डॉक्टर गायब,मरीज बेहाल, स्वास्थ्य सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

Bihar News: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की सच्चाई सामने ला देती है।...

अस्पताल या अव्यवस्था का अड्डा?- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की सच्चाई सामने ला देती है। ताजा मामला पीरो के अनुमंडलीय अस्पताल से सामने आया है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद चिंताजनक नजर आई। शिकायत मिलने के बाद जब पत्रकारों की टीम अस्पताल पहुंची तो कई खामियां खुलकर सामने आ गईं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां भवन की कमी के कारण पिरो उप-मंडल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  तीनों एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। नतीजा यह है कि अस्पताल परिसर में हर समय भीड़ और अफरातफरी का माहौल बना रहता है।दोपहर के समय ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ लगी हुई थी। इलाज के लिए आए मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए। अस्पताल के रोस्टर के मुताबिक शुक्रवार को ओपीडी में डॉ. रवि कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. सुचित कुमार पासवान, डॉ. शिप्रा कुमारी और डॉ. अर्चना कुमारी की ड्यूटी तय थी।लेकिन मौके पर दो डॉक्टर डॉ. शिप्रा कुमारी और डॉ. अर्चना कुमारी ड्यूटी से नदारद पाई गईं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और कई लोग नाराजगी जताते दिखाई दिए।

इतना ही नहीं, अस्पताल में दंत चिकित्सक और फिजियोथेरापिस्ट की भी रोजाना ड्यूटी तय है, लेकिन जांच के दौरान दोनों ही विशेषज्ञ अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। इससे साफ जाहिर होता है कि अस्पताल की व्यवस्था कागजों में कुछ और और जमीन पर कुछ और है।

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो मौजूद है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में यह सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है। मजबूरन मरीजों को जांच कराने के लिए निजी क्लीनिक का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

कर्मचारियों की कमी भी बड़ी समस्या बन चुकी है। यहां सात चतुर्थवर्गीय कर्मियों की नियुक्ति हुई थी, लेकिन उनमें से तीन को आरा के सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को कभी पुलिस तो कभी अस्पताल के गार्ड के सहारे स्ट्रेचर पर लाना पड़ता है।

इस मामले पर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि डॉ. शिप्रा कुमारी का यहां से स्थानांतरण हो चुका है और डॉ. अर्चना कुमारी बिना सूचना के अनुपस्थित हैं। उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या पीरो अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम भी उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट- आशीष कुमार