Bihar Pride: बिहार का गौरव बढ़ा! सात दशक की साधना को मिला सम्मान,पद्मश्री की चमक से रोशन हुआ राज्य,तीन सूरमा को राष्ट्रीय सम्मान
Bihar Pride: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शुमार पद्मश्री इस बार एक बार फिर बिहार की मिट्टी की खुशबू को राष्ट्रीय मंच पर और भी रौशन कर गया है।
Bihar Pride: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शुमार पद्मश्री इस बार एक बार फिर बिहार की मिट्टी की खुशबू को राष्ट्रीय मंच पर और भी रौशन कर गया है। कुल 131 पद्म पुरस्कारों में 113 पद्मश्री सम्मानों के बीच बिहार के तीन सपूतों को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला, जिससे पूरे राज्य में फ़ख्र और खुशी का माहौल है।
इस बार पद्मश्री से सम्मानित हस्तियों में विश्व बंधु को कला के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय, लोक और रचनात्मक नृत्य की एक नई भाषा गढ़ी और बिहार में आधुनिक नृत्य आंदोलन को सामाजिक चेतना का माध्यम बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
वहीं डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। उन्होंने कृषि शिक्षा को नई दिशा दी और अपने कार्यकाल में शोध, प्रसार और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया।
तीसरे सम्मानित हस्ती भरत सिंह भारती हैं, जिन्हें लोक-संगीत के क्षेत्र में उनके सात दशकों लंबे समर्पण के लिए पद्मश्री से नवाज़ा गया। बचपन से ही संगीत साधना में रमे भारती जी तबला, हारमोनियम, बांसुरी और सितार जैसे वाद्ययंत्रों में निपुण रहे हैं। 1962 से आकाशवाणी पटना के माध्यम से उन्होंने भोजपुरी लोक-संगीत को नई पहचान दिलाई।भोजपुरी लोक संगीत और लोक संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले भोजपुर जिले के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार भरत सिंह भारती को सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया। इस सम्मान के साथ ही न केवल उनकी दशकों लंबी साधना को राष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिली, बल्कि पूरे बिहार और खासकर भोजपुर जिले में गर्व और उत्सव का माहौल छा गया।यह सम्मान समारोह जैसे ही राष्ट्रपति भवन में संपन्न हुआ, वैसे ही बिहार के सहार प्रखंड स्थित ननऊर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। भरत सिंह भारती के पैतृक आवास पर परिजनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। सभी लोग टीवी स्क्रीन से चिपके रहे और पल-पल की ऐतिहासिक घड़ी को देख रहे थे।जैसे ही शाम करीब 5:35 बजे भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया, वैसे ही गांव में जयकारों की गूंज उठी। लोगों ने तालियों और नारों के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इज़हार किया।भरत सिंह भारती ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा भोजपुरी लोक संगीत को समर्पित किया है। वे तबला, हारमोनियम, बांसुरी और सितार जैसे कई वाद्ययंत्रों में निपुण रहे हैं और 1962 से आकाशवाणी पटना के माध्यम से लोकसंगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम करते रहे हैं। उनकी पहचान केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति के संवाहक और परंपरा के संरक्षक के रूप में रही है।उनके इस सम्मान से भोजपुर ही नहीं, पूरे बिहार में सांस्कृतिक गौरव का नया अध्याय जुड़ गया है। गांव ननऊर में आज हर चेहरा गर्व से चमक रहा है और यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित ये सम्मान राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों के साथ बिहार की सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और शैक्षिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है।सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।
कला, शिक्षा और लोक-संस्कृति के इन तीन स्तंभों को मिला यह सम्मान सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। राज्य में इसे लेकर उत्सव जैसा माहौल है और हर ओर इन विभूतियों के योगदान की सराहना हो रही है।