Bihar News : ‘आप काम कीजिए, मैं ऑफिस एक घंटे में आता हूँ’... और फिर नहीं लौटे मनरेगा के जेई अमरेश सिंह, संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत
Bihar News : मनरेगा के जेई अमरेश सिंह की ड्यूटी के दौरान मौत हो गयी. इस घटना के बाद विभाग में शोक की लहर दौड़ गयी है......पढ़िए आगे
ARA : जिले के पीरो और तरारी प्रखंड में कार्यरत मनरेगा के कनीय अभियंता (जेई) अमरेश सिंह की शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मूल रूप से रोहतास जिले के नोखा थाना क्षेत्र के शेखपुरवा गांव के रहने वाले अमरेश सिंह (पिता स्व. रामजी चौधरी) अपनी कार्यकुशलता के लिए जाने जाते थे। उनकी आकस्मिक मृत्यु की खबर मिलते ही विभाग के कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में शोक व्याप्त हो गया है।
सहकर्मियों से कहा था- 'तबीयत ठीक नहीं, एक घंटे में ऑफिस आता हूँ'
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे खाना खाने के बाद अमरेश सिंह को अचानक बेचैनी महसूस हुई। उन्होंने अपने एक सहयोगी को फोन कर अपनी खराब तबीयत की जानकारी दी और किसी को भेजने को कहा। हालांकि, दवा लेने के बाद उन्होंने खुद को संभालते हुए सहयोगियों से कहा, "आप लोग काम कीजिए, मैं एक घंटे में ऑफिस आ रहा हूँ।" लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
कमरे में अचेत मिले, अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने तोड़ा दम
काफी देर तक जब वे कार्यालय नहीं पहुँचे, तो चिंतित सहयोगी उनके डेरे (निवास) पर पहुँचे। वहाँ वे अचेत अवस्था में पड़े मिले। आनन-फानन में उन्हें पीरो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. अभिषेक आनंद ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही उनके पीछे पत्नी रेणु कुमारी, 22 वर्षीय पुत्र अमन और 17 वर्षीय पुत्री गोल्डी सहित पूरे परिवार में कोहराम मच गया।
काम के दबाव और मानसिक तनाव की चर्चा
जेई अमरेश सिंह की मौत के बाद विभाग में काम के बोझ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके कुछ सहकर्मियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वे काफी मानसिक दबाव और तनाव में दिख रहे थे। चर्चा है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय डेडलाइन के कारण वे काफी परेशान थे, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, परिजनों में नाराजगी
इस दुखद घड़ी में प्रशासनिक सुस्ती ने परिजनों के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। मृतक के भाई अरविंद सिंह उर्फ शेरू ने आरोप लगाया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को सूचना दिए जाने के एक घंटे बाद भी पुलिस अस्पताल नहीं पहुँची। पुलिस की इस देरी को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी नाराजगी देखी गई और प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
आशीष की रिपोर्ट