आशा बहाली में रिश्वत का खेल : बारूण CHC की बीसीएम कुसुम कुमारी निलंबित, DM अभिलाषा शर्मा ने की बड़ी कार्रवाई
औरंगाबाद जिले में आशा कार्यकर्ताओं की बहाली में रिश्वतखोरी के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है। डीएम अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर बारूण सीएचसी की बीसीएम कुसुम कुमारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है...
Aurangabad : जिले के बारूण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में आशा कार्यकर्ताओं की बहाली में बड़े पैमाने पर पैसे के लेन-देन की शिकायत सामने आई थी। इस भ्रष्टाचार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद जिलाधिकारी (DM) अभिलाषा शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक त्रि-स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया था। जांच टीम ने जब वायरल वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया, तो शिकायतकर्ता और बीसीएम कुसुम कुमारी के बीच पैसों के अवैध लेन-देन के आरोप शत-प्रतिशत सत्य पाए गए।
जिला स्वास्थ्य समिति ने की निलंबन की अनुशंसा
जांच रिपोर्ट में मामला पूरी तरह सही पाए जाने के बाद अपर समाहर्ता (लोक शिकायत निवारण) की अध्यक्षता वाले जांच दल ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। इसके बाद इस गंभीर विषय पर जिला स्वास्थ्य समिति से आधिकारिक मंतव्य (राय) मांगा गया। जिला स्वास्थ्य समिति ने भी मामले की संवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूतों को देखते हुए बीसीएम कुसुम कुमारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मजबूत सिफारिश की।
तत्काल प्रभाव से निलंबन, सदर अस्पताल तय हुआ मुख्यालय
जांच दल की विस्तृत रिपोर्ट, जिला स्वास्थ्य समिति की आधिकारिक अनुशंसा और राज्य स्वास्थ्य समिति के कड़े प्रावधानों को आधार बनाते हुए डीएम अभिलाषा शर्मा ने बीसीएम कुसुम कुमारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) करने का लिखित आदेश जारी कर दिया। आदेश के मुताबिक, निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान आरोपी बीसीएम का आधिकारिक मुख्यालय सदर अस्पताल, औरंगाबाद तय किया गया है। इसके साथ ही डीएम ने सिविल सर्जन को पूरे मामले में आगे की विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई तेजी से शुरू करने का सख्त निर्देश दिया है।
डीएम की दो टूक: भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
इस बड़ी और दंडात्मक कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। डीएम ने दो टूक शब्दों में साफ किया कि औरंगाबाद जिले के भीतर सभी सरकारी योजनाओं, नियुक्तियों और प्रशासनिक कार्यों में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यदि किसी भी विभाग में आम जनता से जुड़ी योजनाओं या नियुक्तियों में थोड़ी भी अनियमितता, घूसखोरी या भ्रष्टाचार का मामला सामने आता है, तो आरोपी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ इसी तरह की कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिले के प्रशासनिक हलके और स्वास्थ्य महकमे में मचा हड़कंप
स्वास्थ्य विभाग की एक जिम्मेदार अधिकारी पर रिश्वतखोरी के आरोप प्रमाणित होने और सीधे जिलाधिकारी स्तर से निलंबन की गाज गिरने के बाद पूरे औरंगाबाद जिले के प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है। विशेषकर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी और कर्मचारियों के बीच इस कार्रवाई से हड़कंप की स्थिति है। आम जनता और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन के इस त्वरित और कड़े फैसले का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों से सरकारी सिस्टम में बैठे भ्रष्ट तत्वों पर लगाम लगेगी और योग्य व जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट