कोर्ट का बड़ा फैसला : दहेज के लिए पत्नी को सुसाइड के लिए उकसाने मामले में पति को 10 साल की कठोर कारावास की सजा, सास-सासुर को भी 3-3 साल जेल

बगहा की अदालत ने दहेज के लिए पत्नी को उकसाने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में पति के साथ-साथ सास और ससुर को भी दोषी करार देते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है.....

दहेज मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला- फोटो : धीरज पराशर

Bagha : पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र से जुड़े एक चर्चित मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने दहेज प्रताड़ना और पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी पति रंजीत चौधरी को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर आर्थिक दंड भी लगाया है। इसके अलावा, इस मामले में मृतका की सास और ससुर को भी सजा दी गई है। यह पूरा मामला रामनगर थाना कांड संख्या 28/2017 से जुड़ा हुआ है।


क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, रीना देवी की शादी वर्ष 2002 में रंजीत चौधरी के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा उसे दहेज की मांग को लेकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। इसी प्रताड़ना के परिणामस्वरुप 19 जनवरी 2017 को रीना देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में आग में जलने से मौत हो गई थी। घटना के बाद मृतका के पिता उपेन्द्र प्रसाद के बयान पर रामनगर थाने में प्राथिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी।


अदालत में पेश किए गए ठोस साक्ष्य और गवाह

लोक अभियोजक जितेन्द्र भारती ने जानकारी दी कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कई अहम गवाहों की गवाही कराई गई और पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इन सभी सबूतों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि विवाहिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने और उकसाने में आरोपितों की सीधी संलिप्तता साबित होती है।


किस आरोपी को मिली कौन सी सजा?

अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

  • पति रंजीत चौधरी: धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत 10 वर्ष की कठोर कारावास और 1 लाख रुपये का अर्थदंड। इसके अलावा धारा 498ए (दहेज प्रताड़ना) के तहत 3 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
  • सास दयमंती देवी और ससुर मथुरा प्रसाद: दोनों को धारा 306 के तहत 3-3 वर्ष की कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड तथा धारा 498ए के तहत 3-3 वर्ष का कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है।


लगभग नौ साल चले इस लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत के इस सख्त फैसले से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है, साथ ही दहेजलोभियों के लिए एक कड़ा संदेश भी गया है।


धीरज पराशर की रिपोर्ट