वज्रपात से जीविका दीदी की दर्दनाक मौत,10 महीने पहले पिता और अब मां का साया उठा,दो मासूम बच्चे हुए अनाथ

बांका जिले के धोरैया (धनगरसा गांव) में वज्रपात से जीविका कार्य कर रही 40 वर्षीय विमला देवी की दर्दनाक मौत हो गई। 10 महीने पहले पति के निधन के बाद अब मां की मौत से दो मासूम पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

बांका में आकाशीय बिजली गिरने से जीविका दीदी की दर्दनाक मौत- फोटो : news 4 nation

बांका जिले के धोरैया प्रखंड अंतर्गत धनकुंड थाना क्षेत्र के धनगरसा गांव में मंगलवार को एक अत्यंत दर्दनाक हादसा हो गया। गांव की 40 वर्षीय विमला देवी जीविका से जुड़े ई-केवाईसी का काम कराने के लिए घर से निकली थीं। इसी दौरान अचानक मौसम बदलने और तेज बारिश के बीच हुए भीषण वज्रपात की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही झुलसकर मौत हो गई। इस अकस्मात घटना से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।


10 महीने पहले उठा था पिता का साया, अब मां की मौत से अनाथ हुए दो मासूम

यह हादसा परिवार के लिए अत्यंत हृदयविदारक साबित हुआ है। मृतका के पति राजू राय का निधन महज 10 महीने पूर्व ही हुआ था, जिसके बाद से विमला देवी मजदूरी कर परिवार चला रही थीं। इस घटना ने उनकी 15 वर्षीय पुत्री अंजू कुमारी और 6 वर्षीय पुत्र विश्वकर्मा के सिर से मां का साया भी छीन लिया। परिवार में दादा-दादी भी नहीं हैं, जिससे दोनों मासूम बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं और ग्रामीणों में उनके भविष्य को लेकर गहरी चिंता है।


पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

घटना की सूचना मिलते ही धनकुंड थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, बांका भेज दिया है। थाना स्तर से मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई और कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।


ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने की मुआवजे की मांग

हादसे के बाद वार्ड सदस्य बेबी राज देवी, वार्ड प्रतिनिधि पालानंद राय, सीएम करुणा देवी और मुखिया प्रतिनिधि मंटू पासवान सहित कई ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और ढांढस बंधाया। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से अनाथ हुए दोनों बच्चों के भरण-पोषण, पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत उचित सरकारी मुआवजा एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

बांका से चंद्रशेखर कुमार भगत की रिपोर्ट