Tuition Love Affair: ट्यूशन पढ़ाते-पढ़ाते छात्रा के प्यार में पड़ गए गुरुजी, पकड़े जाने के बाद इश्क-ए-उस्ताद ने मंदिर की चौखट पर ली सात फेरे

Tuition Love Affair: जब बाहों के खुशबू के घेरे में इन दोनों परिंदों को एक ही आशियाने में परवान चढ़ते देखा गया, तो लोगों के होश फाख्ता हो गए।

प्रेम की पाठशाला- फोटो : reporter

Tuition Love Affair: जब शिक्षा के मंदिर में इश्क का मुजरा शुरू हो, तो समाज की पुरानी रवायतें खुद-ब-खुद मूक दर्शक बन जाती हैं। बांका के शंभूगंज से आई यह दास्तान-ए-मोहब्बत कुछ ऐसी ही है, जहाँ एक गुरु-शिष्या का पवित्र रिश्ता रातों-रात लैला-मजनुनाना अध्याय में तब्दील हो गया।

किस्सा कुछ यूं है कि दुर्गेश दास, जो बच्चों को अरेबिक-अल्फाबेट और कैलकुलस पढ़ाने का ठेका लिए बैठे थे, खुद दिल की क्लास में ऐसे फेल हुए कि अपनी ही छात्रा खुशी कुमारी के साथ रंगे हाथों धर लिए गए। जनाब बच्चों को ए फॉर एप्पल पढ़ा रहे थे, मगर खुद इश्क के फल का स्वाद चख बैठे। सोमवार की रात जब बाहों के खुशबू के घेरे में इन दोनों परिंदों को एक ही आशियाने में परवान चढ़ते देखा गया, तो परिजनों के होश फाख्ता हो गए। फिर क्या था, पूरा गांव तमाशा-ए-इश्क देखने उमड़ पड़ा।

मामला जब थाने की दहलीज पर पहुँचा, तो वहाँ पंचायत-ए-खास बैठी। खाकी वर्दी वाले थानाध्यक्ष प्रभाकर कुमार ने इस जुर्म-ए-मोहब्बत पर पर्दा डालने के लिए दोनों पक्षों को बुलाया। घंटों मशविरा और मान-मनौव्वल का दौर चला। पुलिस ने सोचा होगा कि डंडे के जोर पर इस इश्क के फसाने को दफना दिया जाएगा, लेकिन समाज के ठेकेदारों ने अंततः समझौते का मरहम लगाना ही बेहतर समझा।

इकरारनामे और शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए और फौरन  विवाह के फेरों का बंदोबस्त सोमेश्वर नाथ मंदिर में कर दिया गया। अब जरा सोचिए! जिस मास्टर साहब को कल तक लोग गुरु के रहनुमा समझ रहे थे, आज वे उसी छात्रा के पति बन बैठे हैं।

अजब खेल है इस मोहब्बत का, जहाँ किताब और कलम छूट जाते हैं, और सिर्फ सात फेरे व हथेलियों की लकीरें ही मुकद्दर का फैसला करती हैं!अब दुर्गेश अपनी मैडम यानी कि नई-नवेली पत्नी को लेकर घर पहुँच चुके हैं। इस अनोखे इश्क-ए-कारनामे ने यह साबित कर दिया है कि जब दिल मचल जाए, तो न तो उम्र की कोई कैद होती है और न ही गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते की कोई मर्यादा!

बहरहाल बांहों में मस्ती के घेरे से  दोनों प्रेमी प्रेमिका अब पति पत्नी बन चुके हैं। अब दोनों के रुह एकाकार हो गए है। लेकिन सवाल गुरु- शिष्या के संबंध को लेकर खड़े तो हो हीं गए हैं । 

रिपोर्ट- चंद्रशेखर कुमार भगत